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माघ मेले में पंचकोसी परिक्रमा शुरू, संगम तट से 5 दिवसीय यात्रा का शुभारंभ

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

प्रयागराज: माघ मेले के दौरान प्रयाग की सनातन परंपरा और आस्था की प्रतीक पंचकोसी परिक्रमा का सोमवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के नेतृत्व में त्रिवेणी संगम पर गंगा पूजन के साथ साधु-संतों ने परिक्रमा की शुरुआत की। यह धार्मिक यात्रा पांच दिनों तक चलेगी, जिसका समापन अंतिम दिन भंडारे के आयोजन के साथ होगा।

गंगा पूजन के बाद साधु-संतों का जत्था अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर पहुंचा। इसके उपरांत पहले दिन की परिक्रमा पूर्ण हुई। माघ मेला प्रशासन को इस दौरान यातायात और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा प्रयाग की प्राचीन धार्मिक परंपरा है। प्रयाग मंडल का क्षेत्रीय विस्तार पांच योजन और बीस कोस में माना जाता है, जिसमें गंगा, यमुना और सरस्वती के छह तट शामिल हैं। इनसे अंतर्वेदी, मध्यवेदी और बहिर्वेदी का निर्माण होता है, जिनमें स्थित तीर्थों, उपतीर्थों, आश्रमों और मंदिरों की परिक्रमा को पंचकोसी परिक्रमा कहा जाता है। इस परिक्रमा से श्रद्धालुओं को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा माघ मेले की प्राचीन परंपरा रही है। करीब 556 वर्ष पूर्व मुगल शासक अकबर के समय यह परंपरा बाधित हो गई थी। लंबे अंतराल के बाद साधु-संतों की मांग और योगी सरकार के प्रयासों से वर्ष 2019 में इसे पुनः शुरू किया गया, जो अब निरंतर रूप से आयोजित हो रही हैं।