लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल : मनुष्य जीवन प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष है,जिसमें व्यक्ति जो चाहे वह फल पा सकता है।जीवन प्रत्यक्ष देवता है,जिसकी साधना व आराधना तुरंत साधक को फल देती है।ईश्वर की आराधना का फल कब मिले,कुछ कह नहीं सकते,लेकिन आत्मदेवता तुरंत फलित होते हैं।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद्,रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
आवश्यकता इसके स्वरूप को समझने व इसमें समाहित संभावनाओं को साकार करने की है।मानवीय जीवन असीम संभावनाओं से भरा हुआ है।शास्त्रों में वर्णित है कि व्यक्ति में वे सारी संभावनाएं बीज रूप में विद्यमान हैं,जो स्वयं परमात्मा में हैं। 'ईश्वर अंश जीव अविनाशी ' के रूप में ,ईश्वर के राजकुमार के रूप में मनुष्य ईश्वर की सबसे अनुपम प्रतिकृति है।यदि वह चाहे तो ईश्वरप्रदत अंतर्निहित क्षमताओं को जाग्रत करते हुए इनको साकार कर सकता है और अद्भुत कार्य कर सकता है।इसी आधार पर मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं।अपने तप एवं पुरुषार्थ के आधार पर स्वर्ग का राज्य भी उसके लिए जरा-सा भी दूर नहीं रह जाता।इसके लिए ईश्वर ने इंसान को सकल संभावनाओं के साथ युक्त किया है।मनुष्य को शरीर,समय एवं मनोयोग के रूप में ऐसे प्राकृतिक उपकरण एवं साधन उपलब्ध हैं,जिनका सही नियोजन करते हुए वह मनचाही उपलब्धि को प्राप्त कर सकता है।इसके साथ कल्पना,इच्छा,विचार,भाव एवं अंतर्प्रज्ञा जैसी शक्तियाँ एवं विशेषताएँ उसको विशिष्ट बनाती हैं,जिनका नियोजन करते हुए वह अपनी इच्छित सृष्टि का सृजन कर सकता है।







