लोकल डेस्क, एन के सिंह।
उत्कृष्ट अनुसंधान करने वाले जांबाज पुलिस अधिकारियों को मिला प्रशस्ति पत्र।
मुजफ्फरपुर: जब रक्षक की आंखों में कर्तव्य की चमक और हाथों में कानून का हंटर हो, तो अपराधियों के साम्राज्य की चूलें हिलना तय है। मुजफ्फरपुर पुलिस केंद्र का 'आनंद भवन' महज एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि अपराधियों के अंत की पटकथा लिखने वाली 'न्याय की अदालत' नजर आ रहा था। जिले के कप्तान एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने मासिक अपराध समीक्षा बैठक में जो तेवर दिखाए, उसने साफ कर दिया है कि मुजफ्फरपुर की फिजाओं में अब खौफ सिर्फ अपराधियों के हिस्से आएगा।
कामचोरों को 'हंटर' और जांबाजों को 'सम्मान'
बैठक की शुरुआत जितनी अनुशासित थी, उसका संदेश उतना ही मार्मिक और गहरा था। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि उनके राज में 'जी-हुजुरी' नहीं, 'जन-सेवा' चलेगी। एक तरफ जहां लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के लिए कप्तान की तीखी नजरें 'हंटर' का काम कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर जिले के उन जांबाज अधिकारियों के लिए उनके हाथ खुले थे, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर पेचीदा मामलों को सुलझाया। एसएसपी ने खुद अपने हाथों से उत्कृष्ट अनुसंधान (Investigation) करने वाले जांबाजों को प्रशस्ति पत्र देकर नवाजा। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर पुलिसकर्मी की रगों में कर्तव्यनिष्ठा का संचार हो गया। कप्तान का संदेश साफ था, "बेहतर काम करोगे तो सिर आंखों पर बिठाए जाओगे, कोताही बरती तो बख्शे नहीं जाओगे।"
फाइलें पलटीं, तो उड़े थानेदारों के होश
क्राइम मीटिंग के दौरान जब एसएसपी ने बारी-बारी से लंबित कांडों की फाइलें पलटनी शुरू कीं, तो कई थाना प्रभारियों के माथे पर पसीना छलक आया। फरार वारंटियों की गिरफ्तारी में देरी और कुर्की की कार्रवाई में ढिलाई पर कप्तान ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि मुजफ्फरपुर पुलिस अब 'पूरी तरह अलर्ट' है और आने वाले दिनों में पुलिस का रौद्र रूप सड़कों पर दिखेगा। बैठक के मुख्य निर्देश मादक पदार्थों के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश। महिला सुरक्षा सर्वोपरि महिलाओं के विरुद्ध अपराध और साइबर ठगी के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति।
वारंटियों की खैर नहीं
फरार अपराधियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने का सख्त निर्देश।
"जनता की उम्मीद है थाना, खौफ का केंद्र नहीं"
अधिकारियों को नसीहत देते हुए एसएसपी कांतेश मिश्रा भावुक और सख्त दोनों नजर आए। उन्होंने कहा, "जब कोई आम आदमी थाने की दहलीज पर कदम रखे, तो उसकी आंखों में न्याय की उम्मीद होनी चाहिए, न कि खाकी का डर। जनता से व्यवहार सौहार्दपूर्ण रखें, लेकिन जब सामना किसी अपराधी से हो, तो कानून का हाथ सबसे कठोर होना चाहिए।"
बदलाव की आहट: जेल या जिला बदर
सिटी एसपी मोहम्मद मोहिबुल्लाह अंसारी और ग्रामीण एसपी की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने अपराधियों के बीच यह संदेश पहुंचा दिया है कि अब उनके पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं— या तो जेल की सलाखें या फिर जिला बदर की कार्रवाई। आनंद भवन से निकली यह गूंज अब जिले के कोने-कोने में अपराधियों के पसीने छुड़ा रही है।
मुजफ्फरपुर की जनता अब राहत की सांस ले सकती है, क्योंकि 'कलेक्टर ऑफ क्राइम' ने खुद मैदान संभाल लिया है।







