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मुरारपुर हथियार कांड: मुखिया पति 'ढोलकवा' के साम्राज्य का एक और सिपाही गिरफ्तार

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

अस्पताल के बेड पर पड़ा मिला फरार अपराधी; पुलिस अभिरक्षा में चल रहा इलाज

पूर्वी चंपारण:  पुलिस ने जिले के चर्चित हथियार बरामदगी मामले में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। मुरारपुर की पूर्व मुखिया फरजाना खातून के घर से पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में मिला था हथियारों के जखीरे के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात कमरुद्दीन मियां उर्फ 'ढोलकवा' के सबसे खास गुर्गे, बबलू मियां को पुलिस ने दबोच लिया है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब आरोपी एक आपसी विवाद में घायल होने के बाद चोरी-छिपे अपना इलाज करा रहा था।

कैसे गिरफ्त में आया 'जमीन कब्जाऊ' गिरोह का सदस्य?

जानकारी के अनुसार, तुरकौलिया थाना क्षेत्र के बलही गांव निवासी बबलू मियां पिछले कई महीनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में अपने पड़ोसियों के साथ हुई एक हिंसक झड़प में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। कानून के लंबे हाथों से बचने के लिए उसने शहर के एक निजी अस्पताल में अपनी पहचान छिपाकर शरण ली थी।
लेकिन पुलिस के सटीक सूचना तंत्र ने उसकी इस चालाकी को नाकाम कर दिया। प्रशिक्षु डीएसपी सह थानाध्यक्ष ऋषभ कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने अस्पताल में घेराबंदी कर उसे अपनी अभिरक्षा में ले लिया है। फिलहाल, अस्पताल का वह कमरा जहाँ बबलू भर्ती है, पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका है।

"बबलू मियां को जख्मी हालत में हिरासत में लिया गया है। फिलहाल वह पुलिस की कड़ी निगरानी में इलाजरत है। उसके स्वस्थ होते ही उसे रिमांड पर लेकर गिरोह के अन्य सदस्यों और हथियारों के नेटवर्क के बारे में गहन पूछताछ की जाएगी।"

ऋषभ कुमार, प्रशिक्षु डीएसपी सह थानाध्यक्ष, हरसिद्धि

ऑपरेशन 'हथियार जखीरा' फ्लैशबैक

12 सितंबर 2025 को सरिसवा स्थित मुखिया के घर हुई थी ऐतिहासिक छापेमारी।

अंडरग्राउंड हॉल की गुप्त पेटी से कारबाइन, आधा दर्जन पिस्टल, रायफल और कारतूसों का बड़ा भंडार।
 
अवैध हथियारों के बल पर कीमती जमीनों पर कब्जा करना और हथियारों की तस्करी।
 
मुखिया फरजाना खातून और मास्टरमाइंड कमरुद्दीन उर्फ ढोलकवा पहले ही जेल की सलाखों के पीछे हैं।

खौफ का वो 'अंडरग्राउंड' ठिकाना

बता दें कि सितंबर 2025 में जब तत्कालीन थानाध्यक्ष सर्वेंद्र कुमार सिन्हा ने पुलिस बल के साथ मुरारपुर में छापेमारी की थी, तो नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। मुखिया के घर के भीतर एक गुप्त तहखाना (अंडरग्राउंड हॉल) बनाया गया था, जहाँ से हथियारों की बड़ी खेप बरामद हुई थी। पुलिस की एफआईआर में सात मुख्य आरोपियों के नाम दर्ज थे, जिनमें बबलू मियां पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ था।

सफेदपोश मददगारों के चेहरे होंगे बेनकाब

पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि बबलू मियां की गिरफ्तारी से पुलिस को उम्मीद है कि अब इस गिरोह के बचे हुए गुर्गों और उनके 'सफेदपोश' मददगारों के चेहरे भी बेनकाब होंगे। यह गिरोह न केवल चंपारण बल्कि सीमावर्ती इलाकों में भी हथियारों की सप्लाई और जमीन विवादों में खूनी खेल खेलने के लिए कुख्यात था।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि फरारी के दौरान बबलू को किन-किन लोगों ने पनाह दी थी। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।