मोतिहारी: BPSC का अभेद्य चक्रव्यूह, कड़े पहरे में 15 हजार परीक्षार्थी देंगे अग्निपरीक्षा
लोकल डेस्क, एन के सिंह।
15,864 परीक्षार्थियों के भाग्य का फैसला 14 से 21 अप्रैल के बीच तीन चरणों में आयोजित होने वाली इस विशेष प्रतियोगिता परीक्षा से होगा।
पूर्वी चंपारण: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित ‘सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी’ प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है और सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम किए हैं कि कदाचार की मंशा रखने वालों के हौसले पस्त हो जाएंगे। जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में समाहारणालय स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद भवन के सभागार में आयोजित संयुक्त ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट संदेश दिया गया कि परीक्षा की शुचिता और पवित्रता सर्वोपरि है। जिले के कुल 24 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होने वाली इस महापरीक्षा में 15,864 परीक्षार्थी अपनी किस्मत आजमाएंगे, जिनकी निगरानी के लिए दंडाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की भारी फौज तैनात की गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सुशासन और पारदर्शिता की इस कसौटी पर किसी भी स्तर की लापरवाही अक्षम्य होगी।
यह प्रतियोगिता परीक्षा तीन अलग-अलग चरणों में संपन्न कराई जाएगी, जिसकी समय-सारणी बेहद व्यवस्थित तरीके से तैयार की गई है। परीक्षा का प्रथम चरण 14 और 15 अप्रैल को निर्धारित है, जबकि द्वितीय चरण 17 और 18 अप्रैल को एवं तृतीय चरण 20 और 21 अप्रैल को संपन्न होगा। विस्तृत कार्यक्रम के अनुसार, 14, 17 और 20 अप्रैल को परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी, वहीं 15, 18 और 21 अप्रैल को यह एक पाली में संपन्न होगी। समय की पाबंदी को लेकर प्रशासन बेहद सख्त है; प्रथम पाली सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक होगी, जिसके लिए अभ्यर्थियों को सुबह 8:00 से 9:00 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह द्वितीय पाली दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक चलेगी, जिसमें प्रवेश का समय दोपहर 1:00 से 1:30 बजे तक तय किया गया है। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी सूरत में केंद्र के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश स्टैटिक दंडाधिकारियों को दिया गया है।
सुरक्षा और तकनीक के संगम ने इस बार परीक्षा केंद्रों को एक 'डिजिटल किले' में तब्दील कर दिया है। केंद्रों के प्रवेश द्वार पर ही सघन फ्रिस्किंग (तलाशी) की जाएगी और अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड पर छपे क्यूआर कोड की स्कैनिंग के साथ-साथ उनके फोटो और पहचान पत्र का मिलान बारीकी से किया जाएगा। आधुनिकता का आलम यह है कि सभी केंद्रों पर जैमर लगाए गए हैं ताकि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल काम न कर सके, साथ ही सीसीटीवी कैमरों और बायोमेट्रिक अटेंडेंस के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाएगी। नियमों की कड़ाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि न केवल परीक्षार्थी, बल्कि ड्यूटी पर तैनात वीक्षक, दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी भी केंद्र के भीतर मोबाइल फोन या कोई अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट नहीं ले जा सकेंगे। परीक्षा की गरिमा बनाए रखने के लिए केंद्रों की 500 गज की परिधि में धारा-144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
महिला अभ्यर्थियों की सुविधा और मर्यादा का सम्मान करते हुए विशेष रूप से महिला वीक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी जोनल दंडाधिकारी, केंद्र अधीक्षक और पुलिस बल सुबह 7:00 बजे ही अपने आवंटित केंद्रों पर मोर्चा संभाल लें। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सदर अनुमंडल पदाधिकारी, अपर समाहर्ता और जिला शिक्षा पदाधिकारी जैसे आला अधिकारियों को मुस्तैद किया गया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति या शिकायत के निवारण के लिए जिला नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है, जो दूरभाष संख्या 06252-242418 पर परीक्षा अवधि के दौरान निरंतर कार्यरत रहेगा। मोतिहारी प्रशासन की यह मुस्तैदी और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति यह सुनिश्चित करने के लिए काफी है कि योग्य उम्मीदवारों को उनका हक मिले और पूरी परीक्षा निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हो।







