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मोतिहारी: आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

5 बीघा जमीन और आलीशान मकान वाले ने ली पहली किस्त, दो आवास कर्मियों पर गिरी गाज। शिकायत के बाद हुई जांच में पोल खुलने पर प्रशासन ने लाभुक से 40 हजार रुपये की पहली किस्त वसूल कर सरकारी खाते में वापस जमा कराई।

पूर्वी चंपारण: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में अपात्रों को लाभ पहुँचाने और फर्जीवाड़े के खिलाफ पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। केसरिया प्रखंड के ताजपुर पटखौलिया पंचायत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ 5 बीघा जमीन और पहले से ही आलीशान पक्का मकान होने के बावजूद एक व्यक्ति ने आवास योजना का लाभ उठा लिया। मामला उजागर होने के बाद ग्रामीण विकास विभाग के निर्देश पर दोषी आवास कर्मियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की गई है।

शिकायत और जांच में खुली पोल

पूरा मामला केसरिया प्रखंड के रामपुर गांव का है। यहां के निवासी अशरफ अली ने लोक शिकायत निवारण विभाग में अपील दायर की थी कि उनके गांव के ही मो० सफीउल्लाह के पास लगभग 5 बीघा खेती योग्य जमीन है और उनके पास पहले से ही एक बड़ा पक्का मकान है। इसके बावजूद सफीउल्लाह ने किसी दूसरे की झोपड़ी दिखाकर धोखाधड़ी से आवास योजना की सूची में अपना नाम शामिल करा लिया।

इस गंभीर शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देशानुसार वरीय लेखा पदाधिकारी, DRDA मोतिहारी द्वारा स्थल जांच कराई गई। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि लाभुक सफीउल्लाह का पहले से ही चार कमरों वाला, लंबे बरामदे और बड़े हॉल सहित 8-9 साल पुराना छतदार पक्का मकान बना हुआ है। लाभुक ने अयोग्य होते हुए भी गलत शपथ पत्र देकर वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत आवास योजना का लाभ प्राप्त किया।

सरकारी खजाने की राशि हुई वापस

जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। लाभुक को 25 अप्रैल 2025 को भुगतान की गई 40,000 रुपये की प्रथम किस्त की राशि तत्काल वापस करने का आदेश दिया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) केसरिया ने प्रतिवेदित किया है कि अपात्र लाभुक से पूरी राशि वसूल कर ली गई है और उसे वापस 'स्टेट नोडल अकाउंट' में जमा करा दिया गया है। साथ ही, सफीउल्लाह का नाम योजना की प्राथमिकता सूची से हमेशा के लिए हटा दिया गया है।

लापरवाह आवास कर्मियों पर कड़ा दंड

फर्जीवाड़े के इस खेल में अपनी भूमिका निभाने और सत्यापन में घोर लापरवाही बरतने वाले आवास कर्मियों को भी नहीं बख्शा गया। प्रशासन ने ग्रामीण आवास सहायक और आवास पर्यवेक्षक द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को संतोषजनक न मानते हुए उन पर विभागीय गाज गिराई है। पंचायत ताजपुर पटखौलिया के ग्रामीण आवास सहायक अजय चौधरी पर कार्रवाई करते हुए उनके मूल मानदेय से 10 प्रतिशत की राशि एक वर्ष तक कटौती करने का दंड अधिरोपित किया गया है। वहीं केसरिया प्रखंड के ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक श्रीकांत को कार्य में लापरवाही के लिए लिखित चेतावनी का दंड दिया गया है।

प्रशासन की चेतावनी, नपेंगे अयोग्य लाभुक और दोषी अधिकारी

इस कार्रवाई से पूरे जिले के आवास कर्मियों और गलत तरीके से लाभ लेने वाले बिचौलियों के बीच हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना केवल पात्र और अत्यंत गरीब परिवारों के लिए है। यदि कोई भी अयोग्य व्यक्ति गलत जानकारी देकर या किसी अधिकारी की मिलीभगत से आवास का लाभ लेता है, तो न केवल राशि की वसूली होगी बल्कि संबंधित कर्मियों पर भी इसी तरह की कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।