लोकल डेस्क, नीतीश कुमार।
मोतिहारी: 10 फरवरी। मोतिहारी में चुनावी पराजय के बाद प्रशांत किशोर की पहली बैठक तनावपूर्ण माहौल में हुई। शहर के एक निजी होटल में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हुई इस बैठक में नाराज़ कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए नारेबाज़ी की।
बैठक के दौरान कुछ पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला, जिससे उनमें रोष फैल गया। नाराज़ कार्यकर्ताओं ने प्रशांत किशोर पर गंभीर आरोप लगाए।
“दलालों और चापलूसों से घिरे हैं प्रशांत किशोर”
कार्यकर्ताओं का आरोप था कि प्रशांत किशोर के आसपास दलालों और चापलूस लोगों का घेरा है, जिसके कारण जमीनी कार्यकर्ताओं की वास्तविक बातें उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं। उनका कहना था कि यही हालिया चुनाव में हार की बड़ी वजह बनी।
आरोप यह भी लगाए गए कि लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे लोगों को अनदेखा किया जा रहा है, जबकि बाहरी और प्रभावशाली व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच शोर बढ़ा और कुछ समय के लिए बैठक बाधित हो गई।
प्रशांत किशोर ने संभाली स्थिति
हालात बिगड़ते देख प्रशांत किशोर ने स्वयं हस्तक्षेप किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि संगठन में हर कार्यकर्ता की बात सुनी जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
इसके बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुँचे और नाराज़ कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। काफी देर की मान-मनौव्वल के बाद कार्यकर्ता शांत हुए, जिसके बाद बैठक फिर से शुरू हो सकी।
संगठन के भीतर असंतोष सामने आया
इस घटनाक्रम ने चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर पनप रहे असंतोष को उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि प्रशांत किशोर इन आरोपों और नाराज़गी को किस तरह सुलझाकर संगठन को दोबारा मज़बूत करने की दिशा में कदम उठाते हैं।







