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युवाओं की रगों में 'मीठा जहर' घोल रही हैं एनर्जी ड्रिंक्स, लिवर डैमेज का बढ़ा खतरा

हेल्थ डेस्क , रानी कुमारी

 नई दिल्ली। देश के युवाओं में 'इंस्टेंट एनर्जी' और रात भर जागकर काम करने या गेमिंग करने का क्रेज अब उनकी सेहत के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। हाल के चिकित्सा शोधों और अस्पतालों में बढ़ते मामलों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है—बाजार में मिलने वाली लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक्स युवाओं में लिवर फेलियर और 'एक्यूट हेपेटाइटिस' का नया और सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रही हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, जो युवा दिन में दो या उससे अधिक एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं, उनमें लिवर की कोशिकाओं में सूजन और क्षति के मामले तेजी से बढ़े हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह समस्या उन युवाओं में भी देखी जा रही है जो शराब या सिगरेट का सेवन बिल्कुल नहीं करते।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रिंक्स में केवल कैफीन ही एकमात्र विलेन नहीं है। इनमें मौजूद नियासिन (विटामिन B3) की अत्यधिक मात्रा लिवर के लिए सबसे घातक है। जहाँ शरीर को एक दिन में बहुत कम मात्रा में विटामिन की आवश्यकता होती है, वहीं एक सिंगल कैन में दैनिक जरूरत से 200 से 300 प्रतिशत अधिक विटामिन भर दिए जाते हैं। जब लिवर इतनी भारी मात्रा में विटामिन्स को प्रोसेस करने की कोशिश करता है, तो उसमें 'टॉक्सिसिटी' पैदा हो जाती है, जिससे लिवर टिश्यूज फटने लगते हैं।

लिवर डैमेज की प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि मरीज को शुरुआती दौर में पता ही नहीं चलता। अक्सर थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या जी मिचलाने जैसे लक्षणों को युवा काम का तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब तक आंखों में पीलापन (पीलिया) दिखाई देता है, तब तक लिवर 60 से 70 प्रतिशत तक डैमेज हो चुका होता है। मेडिकल जर्नल में छपे कई मामलों में देखा गया है कि एनर्जी ड्रिंक के अत्यधिक सेवन से स्वस्थ दिखने वाले युवाओं को अचानक लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ गई।

वरिष्ठ हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता बताते हैं, युवा इसे पानी या सॉफ्ट ड्रिंक के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जिम जाने वाले लड़के वर्कआउट के बाद इसे पीते हैं, जो सबसे खतरनाक है क्योंकि उस समय शरीर पहले से ही डिहाइड्रेटेड होता है। शराब के साथ एनर्जी ड्रिंक का मिश्रण तो लिवर के लिए 'डेथ वारंट' जैसा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्य स्वास्थ्य संस्थाएं अब इन पेय पदार्थों पर कड़े नियंत्रण और वैधानिक चेतावनी की मांग कर रही हैं। फिलहाल, डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं कि प्राकृतिक ऊर्जा के लिए फल, मेवे और पर्याप्त नींद का सहारा लें, न कि डिब्बाबंद केमिकल का।