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यूएनएससी में भारत की स्थायी सदस्यता को फिनलैंड का समर्थन

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय

नई दिल्ली | आज भारत और फिनलैंड के कूटनीतिक संबंधों में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार अब अनिवार्य है और भारत को इसमें स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया जाना समय की मांग है।

राष्ट्रपति स्टब ने संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि आज की दुनिया 1945 की दुनिया से बिल्कुल अलग है। उन्होंने जोर देकर कहा, "दुनिया एक संक्रमण काल (transition) से गुजर रही है और भारत, ग्लोबल साउथ के अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह तय करेगा कि भविष्य का वैश्विक क्रम किस दिशा में जाएगा। इसलिए, मेरा मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए एक स्थायी सीट का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।" उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह रायसीना डायलॉग 2026 में अपने संबोधन के दौरान भी इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाएंगे। फिनलैंड के राष्ट्रपति का यह समर्थन भारत के लिए इसलिए भी विशेष है क्योंकि फिनलैंड एक प्रभावशाली नॉर्डिक राष्ट्र है और उसकी आवाज यूरोपीय संघ (EU) में काफी वजन रखती है।
राष्ट्रपति स्टब ने केवल सुरक्षा परिषद ही नहीं, बल्कि भारत की प्रगतिशील विदेश नीति की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को दुनिया के लिए एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को दिखाया है कि कैसे अपने हितों की रक्षा करते हुए बहुपक्षवाद और वैश्विक सहयोग के साथ तालमेल बिठाया जा सकता है। उन्होंने मजाकिया लहजे में लेकिन गंभीरता के साथ कहा, "हमें अपनी नीतियों में थोड़ा और भारतीय (More Indian) होना चाहिए।"

बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के संघर्षों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रपति स्टब और पीएम मोदी इस बात पर सहमत थे कि सैन्य संघर्ष किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते और शांति केवल कूटनीति व बातचीत के जरिए ही संभव है।

आर्थिक मोर्चे पर, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। फिनलैंड की 20 से अधिक प्रमुख कंपनियां इस यात्रा में राष्ट्रपति के साथ आई हैं, जो फिनलैंड की अत्याधुनिक तकनीक, 6G संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।

फिनलैंड का यह खुला समर्थन भारत के उस लंबे संघर्ष को मजबूती प्रदान करता है, जिसमें भारत सुरक्षा परिषद को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग कर रहा है। रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के बाद अब फिनलैंड जैसे महत्वपूर्ण यूरोपीय राष्ट्र का यह बयान दर्शाता है कि वैश्विक नेतृत्व अब भारत की अनदेखी नहीं कर सकता।