स्टेट डेस्क , रानी कुमारी |
यूपी : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व इस बार उन विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है, जहां पिछले चुनावों में हार का अंतर कम रहा था और लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी को सकारात्मक संकेत मिले हैं। इसी रणनीति के तहत सपा के युवा विंग ने आरक्षित सीटों का विस्तृत ग्राउंड सर्वे कर त्रिस्तरीय रिपोर्ट तैयार की है।
सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी ने पहली बार छात्र सभा, युवजन सभा और यूथ ब्रिगेड के माध्यम से जमीनी स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का व्यापक अध्ययन कराया है। इस सर्वे में स्थानीय संगठन की स्थिति, जातीय समीकरण, मतदाताओं की प्राथमिकताएं और क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
पार्टी का मुख्य फोकस उन अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों पर है, जहां वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी और उसके गठबंधन को बेहतर समर्थन प्राप्त हुआ। इन सीटों को आगामी चुनाव में जीत की संभावनाओं वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दलित बहुल क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, सामाजिक संवाद कार्यक्रम चलाने तथा स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की सिफारिश की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में मिले उत्साहजनक परिणामों के बाद सपा अब अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ दलित और युवा मतदाताओं को भी साधने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि पार्टी ने जमीनी स्तर से डेटा एकत्र कर सीटवार रणनीति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यदि यह रणनीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में कई आरक्षित सीटों पर मुकाबला पहले से अधिक रोचक और कड़ा देखने को मिल सकता है।







