लोकल डेस्क, एन के सिंह।
पर्सा में लागत फॉर्म एंट्री के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण संपन्न, डिजिटल प्रणाली से आएगी पारदर्शिता। प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञों ने डेटा प्रबंधन और त्रुटिरहित रिपोर्ट तैयार करने के व्यावहारिक गुर सिखाए।
रक्सौल: भूमिहीन दलितों, सुकुम्बासी (भूमिहीन) और अव्यवस्थित बसोबास करने वाले लोगों की भूमि समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में भूमि समस्या समाधान आयोग, जिला समिति पर्सा ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग द्वारा लागत फॉर्म एंट्री कार्य को अधिक प्रभावी, तीव्र और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आयोजित एकदिवसीय विशेष कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से डेटा प्रबंधन को दुरुस्त करना है ताकि पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द लालपूर्जा उपलब्ध कराया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोग के सदस्य-सचिव राकेश झा की अध्यक्षता में आयोजित हुआ, जिसमें भूमि समस्या समाधान आयोग पर्सा के जिला अध्यक्ष तबरेज अहमद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर विशेषज्ञ सदस्य संतोष राम, सदस्य शिव नारायण राम और कई तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को लागत फॉर्म एंट्री की पूरी प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा, संभावित त्रुटियों के सुधार और डिजिटल रिपोर्ट तैयार करने के व्यावहारिक गुर सिखाए।
मुख्य अतिथि एवं जिला अध्यक्ष तबरेज अहमद ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि भूमिहीनों की समस्या का समाधान केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता भूमिहीन दलितों और सुकुम्बासी परिवारों को भूमि का कानूनी मालिकाना हक (लालपूर्जा) प्रदान करना है। अहमद ने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए आंकड़ों की शुद्धता और मानव संसाधन की दक्षता अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण के बाद लागत फॉर्म एंट्री का कार्य न केवल तेज होगा, बल्कि मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश भी कम होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सदस्य-सचिव राकेश झा ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डिजिटल प्रणाली को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल का होना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे यहाँ सीखे गए कौशल का उपयोग क्षेत्र में जाकर पूरी जिम्मेदारी के साथ करें। प्रतिभागियों ने भी इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी और समयानुकूल बताते हुए कहा कि इससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। इस आयोजन के बाद अब जिले में भूमिहीन समस्या समाधान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी होने की उम्मीद जताई जा रही है।







