लोकल डेस्क, एन के सिंह।
कलयुग में राधा नाम संकीर्तन ही खुशहाली और मुक्ति का एकमात्र मार्ग।
पूर्वी चम्पारण: विराट नगर श्री जी सत्संग समिति के तत्वावधान में सीकरीया फार्मेसी कॉलेज के भव्य 'राधा कॉन्फ्रेंस हॉल' में आयोजित सात दिवसीय राधा-कृष्ण कथा का आज भावपूर्ण समापन हुआ। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज (प्रेम मंदिर, वृन्दावन) की शिष्या सुश्री शक्तिश्वरी देवी की अमृतमयी वाणी ने श्रद्धालुओं को सीधे ब्रज की गलियों और राधा-रानी के अलौकिक प्रेम से जोड़ दिया।
अंतिम दिन का प्रसंग: राधा रानी की महिमा और कृष्ण के साथ उनके अटूट संबंधों की विस्तृत व्याख्या।
भक्ति का सैलाब: 'राधे-राधे गोविंद' के भजनों पर झूम उठे श्रद्धालु, पूरा परिसर राधामय हुआ।
कलयुग में राधा नाम संकीर्तन ही खुशहाली और मुक्ति का एकमात्र मार्ग।
साहित्यिक भेंट: आचार्य डॉ. शंभूनाथ सीकरीया ने देवी जी को अपनी पुस्तकें 'गीता दर्पण' और 'गुरु दर्पण' भेंट कीं।
गणमान्य उपस्थिति: उपमेयर डॉ. लालबाबू प्रसाद सहित शहर के प्रमुख बुद्धिजीवी और राजनेता रहे मौजूद।
एक जीवंत फिल्म की तरह उभरी राधा-कृष्ण की लीला
कथा के अंतिम दिन सुश्री शक्तिश्वरी देवी ने राधा-कृष्ण के प्रसंगों का चित्रण इस कुशलता से किया कि श्रद्धालुओं के सामने पूरी लीला एक फिल्म की भांति जीवंत हो उठी। उन्होंने बताया कि राधा केवल एक नाम नहीं, बल्कि भक्ति की पराकाष्ठा हैं। देवी जी ने कहा, "राधा नाम संकीर्तन ही इस कलयुग के घोर अंधेरे में हमारे मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करेगा। यदि आप अपने घर में खुशहाली और अपने भविष्य को उज्ज्वल देखना चाहते हैं, तो राधा-रानी के चरणों में स्थान बनाइए।"
जैसे ही देवी जी ने मधुर स्वर में भजनों की तान छेड़ी, पंडाल में मौजूद भक्त अपनी सुध-बुध खो बैठे। 'राधे-राधे' के जयघोष से वातावरण ऐसा गुंजायमान हुआ कि हर कोई नाचने और झूमने को मजबूर हो गया।
विद्वानों और दिग्गजों का समागम
इस आध्यात्मिक अवसर पर चक्रवर्ती सम्राट धर्म विभूषण आचार्य डॉ. शंभूनाथ सीकरीया ने देवी जी का विशेष अभिनंदन किया। उन्होंने अपनी लेखनी से रचित दो महत्वपूर्ण पुस्तकें, 'गीता दर्पण' और 'गुरु दर्पण', सप्रेम भेंट स्वरूप प्रदान कीं।
समापन सत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी दिखी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपमेयर डॉ. लालबाबू प्रसाद, भाजपा युवा नेता यमुना सीकरीया, आनंद केडिया, प्रोफेसर चंद्र भूषण पांडे, प्रोफेसर राम निरंजन पांडे, जदयू नेता दीपक पटेल और श्याम जैन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सफल आयोजन में इनका रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में अनिरुद्ध लोहिया, सोनू अग्रवाल, प्रमोद जैन, शैल जैन, प्रदीप सिंह, सुनील कुमार, विकास कुमार, शशि पटेल और अनिल प्रसाद का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने इस आयोजन को मोतिहारी के आध्यात्मिक इतिहास में एक मील का पत्थर बताया है।







