नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
ज्योतिमठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खजांची पर राम मंदिर के दान में कथित चोरी के मामले में बचाव का आरोप लगाया है। स्वामी जी ने ट्रस्ट की संरचना पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि मंदिर की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले साधु-संतों और कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को अपनी 81 दिवसीय ‘गोरक्षा एवं धर्मयुद्ध यात्रा’ के तहत बरेली और पीलीभीत पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दो दिवसीय कार्यक्रम में ये गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दानदाताओं का विश्वास तोड़ने वाली घटनाओं को दबाया जा रहा है और दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
स्वामी जी ने स्पष्ट रूप से ट्रस्ट के खजांची पर निशाना साधते हुए कहा कि चोरी के आरोपों के बावजूद उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ट्रस्ट की वर्तमान संरचना को चुनौती देते हुए पूछा कि आखिर वह कौन लोग हैं जो मंदिर निर्माण के लिए दशकों की लड़ाई में शामिल नहीं थे, लेकिन अब ट्रस्ट में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
ट्रस्ट पर उठे सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत, त्याग और कानूनी संघर्ष किया, उन्हें ट्रस्ट से दूर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कई संत और कार्यकर्ता हैं जिनकी भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
“दान चोरी का मामला गंभीर है। लाखों भक्तों का भावनात्मक लगाव राम मंदिर से जुड़ा है। अगर इस पवित्र धन के दुरुपयोग की आशंका है तो इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए,” स्वामी जी ने कहा। उन्होंने यात्रा के दौरान भक्तों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की और मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता पर जोर दिया।
स्वामी जी की टिप्पणियों ने राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर फिर से बहस छेड़ दी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ था। ट्रस्ट मंदिर निर्माण, रखरखाव और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालता है।
यात्रा का मकसद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ‘गोरक्षा एवं धर्मयुद्ध यात्रा’ 81 दिनों की है। इस यात्रा में गो संरक्षण, हिंदू धर्म की रक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। बरेली और पीलीभीत में उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
स्वामी जी ने अपने संबोधन में कहा कि राम मंदिर केवल एक भवन नहीं बल्कि हिंदू आस्था का प्रतीक है। इसलिए इसके दान की हर पाई का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट से अपील की कि वह आरोपों की जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे।
ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज किया
राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से करोड़ों रुपये का दान आया है। कुछ रिपोर्ट्स में दान प्रबंधन को लेकर सवाल उठे थे, हालांकि ट्रस्ट ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ताजा बयान ने इन मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
स्थानीय स्तर पर स्वामी जी के बयान का असर देखा जा रहा है। कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता इन आरोपों पर चर्चा कर रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि वे यात्रा के दौरान और भी मुद्दों पर जनमत जागृत करेंगे।
ट्रस्ट की भूमिका पर बहस
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में विभिन्न संतों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जैसे कुछ प्रमुख संतों का मानना है कि मूल लड़ाई लड़ने वाले लोगों की उपेक्षा हुई है। उन्होंने ट्रस्ट की सदस्यता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।
स्वामी जी ने भक्तों से आह्वान किया कि वे दान देते समय सतर्क रहें और ट्रस्ट की गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि धर्मयुद्ध अब न केवल बाहरी चुनौतियों बल्कि आंतरिक पारदर्शिता बनाए रखने का भी है।







