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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार |

नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि सदन में सभी सदस्यों के साथ समान व्यवहार नहीं होने और संसद की मर्यादा व गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है।

सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गोगोई ने कहा कि ओम बिरला का व्यक्तिगत संबंध सभी सदस्यों से अच्छा है, लेकिन सदन के भीतर सभी के साथ समान व्यवहार नहीं होता। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का दायित्व बेहद महत्वपूर्ण होता है और उन्हें सदन के संरक्षक के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि सरकार की आवाज बनना चाहिए।

गोगोई ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें कई बार टोका गया, जिसमें रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। इसी दौरान गोगोई ने चीन से जुड़े सीमा मामलों और तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे से संबंधित एक प्रसंग का भी उल्लेख किया।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि चर्चा अविश्वास प्रस्ताव के विषय से भटक रही है। गोगोई ने जवाब में कहा कि यदि सदन में टोका-टाकी की गणना की जाए तो रिजिजू सबसे अधिक हस्तक्षेप करने वाले संसदीय कार्य मंत्री साबित होंगे।

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि रिजिजू इसलिए हस्तक्षेप कर रहे हैं क्योंकि इतना गैरजिम्मेदार विपक्ष पहले कभी नहीं रहा। इस पर गोगोई ने कहा कि शाह के इस बयान से उनके वक्तव्य का दायरा और बढ़ गया है।

चर्चा के दौरान गोगोई ने अमेरिका से जुड़े कुछ दस्तावेजों और एक कारोबारी के नाम का भी जिक्र किया। इस पर पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल ने कहा कि गोगोई को केवल अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े आरोपों पर ही बोलना चाहिए।

इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसका 50 से अधिक सदस्यों ने खड़े होकर समर्थन किया।

वहीं एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जब अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, तब उनके द्वारा नियुक्त पैनल का कोई सदस्य पीठासीन नहीं हो सकता। चूंकि फिलहाल लोकसभा में उपाध्यक्ष नहीं है, इसलिए सदन की राय लेकर किसी अन्य सदस्य को इस दौरान पीठासीन बनाया जाना चाहिए। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी इसी तरह की राय रखी, हालांकि पीठासीन सदस्य ने उनके व्यवस्था के प्रश्न को अस्वीकार कर दिया।