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वंदे मातरम के 150 वर्ष: कर्तव्य पथ पर सैन्य शौर्य और संस्कृति का अद्भुत संगम

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार l

नई दिल्ली, 26 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सैन्य सामर्थ्य और सशस्त्र बलों के जांबाज जवानों की अनुशासित कदमताल का भव्य और गौरवपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला। इस वर्ष की परेड ‘स्वतंत्रता के मंत्र – वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि के मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर आधारित रही।

समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री के आगमन से हुई। उन्होंने पहले राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद वह कर्तव्य पथ पहुंचे, जहां उन्होंने उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति तथा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के शीर्ष नेताओं का स्वागत किया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर पहली बार यूरोपीय संघ के दो वरिष्ठ नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इस वर्ष का आयोजन ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने को समर्पित रहा, जिसके अनुरूप परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और झांकियां इसी विषयवस्तु पर केंद्रित थीं। परेड शुरू होने से पूर्व राष्ट्रपति द्वारा शांति काल के सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

इस बार की परेड में पारंपरिक मार्चिंग टुकड़ियों और रक्षा प्रदर्शनों के साथ-साथ पहली बार भारतीय सेना की युद्ध व्यूह रचना भी प्रदर्शित की गई। पूरे आयोजन में सैनिक अनुशासन, सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय विविधता का संतुलित समन्वय देखने को मिला। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों ने देश की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित किया। वहीं देशभर में राजधानियों, जिलों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों में भी ध्वजारोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

‘स्वतंत्रता के मंत्र – वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि के मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर आधारित राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां परेड में शामिल रहीं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगभग 2500 कलाकारों ने सहभागिता की।

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में देशभर से किसानों, हस्तशिल्पियों, वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, महिला उद्यमियों, विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों सहित करीब 10 हजार विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया था।

परेड में एक नई पहल के तहत दर्शक दीर्घाओं के नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखे गए। सरकार के अनुसार नदियां भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और विविधता की प्रतीक हैं। इसी सोच के तहत इस बार दर्शक दीर्घाओं को विभिन्न नदियों के नाम दिए गए, जबकि पहले इन्हें संख्याओं के आधार पर पहचाना जाता था।

लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने गणतंत्र दिवस समारोह से पहले कई गतिविधियां आयोजित की थीं। युवाओं और रचनात्मक समुदायों को जोड़ने के उद्देश्य से ‘माई गांव’ और ‘माई भारत’ मंचों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं कराई गईं, जिनमें निबंध, पेंटिंग, गायन और क्विज जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।

इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए नागरिकों को ‘माई भारत’ पोर्टल के जरिए आमंत्रित किया गया था।

परेड के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रही और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से समारोह स्थल पर आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी गई।