नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली।केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के लिए तैयार विधेयक सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम का अपमान करता है या इसके गायन में बाधा डालता है, तो उसके खिलाफ तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में पेश करेंगे।
केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' की तरह कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले ही राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन को मंजूरी दे चुका है। संशोधन लागू होने के बाद वंदे मातरम का अपमान दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा और इसके उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार ने राष्ट्रीय गीत की 150वीं जयंती के अवसर पर वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा भी तैयार की है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान का आयोजन होता है, वहां राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का भी अनिवार्य रूप से गायन कराया जाए। सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। वंदे मातरम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से वैचारिक मतभेद रहे हैं। विपक्ष के कुछ दलों ने पहले भी इसके अनिवार्य गायन और इससे जुड़े प्रस्तावों पर अलग रुख अपनाया है। ऐसे में राज्यसभा में विधेयक पेश होने के दौरान इस पर व्यापक चर्चा और तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा लंबे समय से वंदे मातरम को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का महत्वपूर्ण प्रतीक बताती रही है। पार्टी का आरोप है कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रीय गीत को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह अधिकारी है। वहीं, कुछ विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा समय-समय पर वंदे मातरम के गायन से इनकार करने या उस पर विवादित बयान देने की घटनाओं को भी भाजपा इस बहस का प्रमुख आधार बनाती रही है। सरकार का कहना है कि नया कानून राष्ट्रीय गीत की गरिमा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।
प्रस्तावित संशोधन में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके गायन में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान लागू होगा। सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों की तरह राष्ट्रीय गीत को भी समान कानूनी संरक्षण प्रदान करना है, ताकि उसके सम्मान से किसी प्रकार का समझौता न हो।
यह विधेयक सोमवार को राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल है। सदन में पेश किए जाने के बाद इस पर चर्चा होगी और पारित होने की स्थिति में इसे आगे लोकसभा में विचार और मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अब सभी की नजर संसद में होने वाली बहस और इस महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पर विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख पर टिकी हुई है।







