Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

वैश्विक कारकों से अगले सप्ताह तय होगी शेयर बाजार की दिशा

विदेश डेस्क, ऋषि राज

मुंबई: बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में लगातार मजबूती देखने के बाद अब निवेशकों की निगाहें आने वाले सप्ताह के वैश्विक और घरेलू आर्थिक घटनाक्रमों पर टिक गई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ कारोबारी सत्रों में विदेशी संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी।

पिछले सप्ताह शुरुआती दो कारोबारी दिनों में बाजार दबाव में रहा, लेकिन सप्ताह के अंतिम तीन दिनों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसी के चलते बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने साप्ताहिक आधार पर बढ़त दर्ज की। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली, जिससे व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगले सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों पर बाजार की विशेष नजर रहेगी। खासकर टीसीएस के नतीजे पूरे आईटी सेक्टर की दिशा तय कर सकते हैं। यदि परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता तथा मध्य पूर्व की परिस्थितियां भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार पर सीधे तौर पर पड़ सकता है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत और डॉलर इंडेक्स की चाल पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को मौजूदा उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश जारी रखना चाहिए। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और पूंजीगत वस्तुओं से जुड़े शेयरों में आगे भी अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि किसी भी वैश्विक तनाव या अप्रत्याशित आर्थिक घटनाक्रम से बाजार में अस्थायी दबाव आ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।