Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

शेख हसीना को फांसी की सजा

विदेश डेस्क, ऋषि राज |

शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा

देश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पिछले वर्ष छात्र आंदोलन पर हुई हिंसक कार्रवाई के लिए मानवता के खिलाफ अपराध (Crimes Against Humanity) का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। 78 वर्षीय हसीना फिलहाल भारत में शरण लिए हुए हैं और फरार घोषित की गई हैं। उन्हें अनुपस्थिति में ही यह सजा सुनाई गई।

जुलाई से अगस्त 2024 के बीच बांग्लादेश में छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए विरोध प्रदर्शन को हसीना सरकार ने कड़ी ताकत से दबाया था। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग घायल हुए, जिनमें से अधिकांश को सुरक्षा बलों की गोलीबारी का सामना करना पड़ा। इसे 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद देश में हुई सबसे बड़ी हिंसा बताया गया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह हिंसा नागरिक आबादी पर सुनियोजित और व्यापक हमला थी। कोर्ट के अनुसार, हसीना ने न सिर्फ इस कार्रवाई की “सीधी अनुमति” दी, बल्कि ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के उपयोग का भी आदेश दिया। साथ ही, एक जिम्मेदार प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्होंने हिंसा रोकने या दोषियों को दंडित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

अदालत का कड़ा अवलोकन

फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा:

  • “प्रदर्शनों के दौरान हुई हत्याएं और गंभीर चोटें व्यापक और संगठित रूप से की गईं।”
  • “प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हिंसा भड़काने और उसे रोकने में विफल रहकर मानवता के खिलाफ अपराध किया।”
  • “ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के उपयोग का आदेश देकर हसीना ने एक और अपराध किया।”

फैसले से ठीक पहले देश तनाव की गिरफ्त में था। पिछले 72 घंटों में:

  • 30 से अधिक क्रूड बम धमाके
  • 26 वाहनों में आगजनी

देशभर में भारी पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती

हसीना समर्थक और उनकी अवामी लीग के कार्यकर्ता फैसले के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की तैयारी में हैं।

अंतरिम सरकार का बयान

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बताने के आरोपों को खारिज किया। सरकार के प्रवक्ता ने कहा:
"ट्रिब्यूनल पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। न कोई राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ और न ही प्रक्रिया प्रभावित की गई।" हसीना को एक सरकारी वकील दिया गया था, लेकिन उन्होंने कोर्ट की वैधता मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने AFP को दिए एक लिखित इंटरव्यू में कहा था कि निर्णय “पहले से लिखा हुआ” है।

भारत से जुड़ा विवाद

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कुछ दिन पहले भारत के राजदूत को तलब कर कहा कि भारत हसीना को "प्लेटफॉर्म" दे रहा है और मीडिया से बात करने की अनुमति दे रहा है। सरकार ने भारत से कहा है कि वह “फरार अपराधी” का समर्थन न करे।

आगे क्या?

हसीना का बेटा सजीब वाजेद पहले ही कह चुके हैं कि वे फैसले को मौत की सजा ही मानकर चल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी मां भारत में “सुरक्षित हैं” और उन्हें भारतीय सुरक्षा बलों का संरक्षण प्राप्त है।

बांग्लादेश में अगले वर्ष चुनाव होने वाले हैं और अवामी लीग पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में यह फैसला देश की राजनीति को पूरी तरह नए मोड़ पर ले आया है।