नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मोतिहारी द्वारा संघ शताब्दी वर्ष के पंचम कार्यक्रम “प्रमुख नागरिक गोष्ठी” का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन संपन्न
मोतिहारी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत मोतिहारी स्थित राम भवन, राम यमुना प्रसाद होटल एवं रिजॉर्ट में पंचम कार्यक्रम “प्रमुख नागरिक गोष्ठी” का भव्य, अनुशासित एवं गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर बिहार प्रांत के माननीय सह प्रांत संघचालक राजकिशोर जी, मोतिहारी जिले के सह जिला संघचालक श्याम सुंदर राम जी, मोतिहारी नगर के नगर संघचालक उदय नारायण जी तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं बौद्धिककर्ता आदरणीय मुकुल कानिटकर जी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अभिषेक ठाकुर जी द्वारा सामूहिक गीत “जाग रहा जन-गण-मन, निश्चित होगा परिवर्तन” प्रस्तुत किया गया, जिससे सभागार में उपस्थित सभी प्रमुख नागरिकों ने सामूहिक रूप से गाया। गीत के माध्यम से राष्ट्र जागरण, सामाजिक परिवर्तन एवं सकारात्मक ऊर्जा का भाव पूरे वातावरण में स्पष्ट रूप से अनुभूत हुआ और पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति एवं सांस्कृतिक चेतना का भाव व्याप्त हो गया।
मंचासीन अधिकारियों का परिचय मोतिहारी जिले के जिला सह संपर्क प्रमुख डॉ. नरेंद्र सिंह जी द्वारा कराया गया। कार्यक्रम का संचालन अत्यंत अनुशासित एवं प्रभावशाली ढंग से जिला संपर्क प्रमुख श्री सतीश टंडन जी ने किया। कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता आदरणीय मुकुल कानिटकर जी द्वारा विषय प्रवेश एवं बौद्धिक उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। द्वितीय सत्र में उपस्थित प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर उपस्थित जनों द्वारा जिज्ञासाएँ रखी गईं और श्री मुकुल कानिटकर जी ने अत्यंत सरल, तथ्यपूर्ण एवं विचारोत्तेजक शैली में सभी प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया।
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में आदरणीय श्री मुकुल कानिटकर जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने विगत सौ वर्षों में व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की एक मौन, सतत एवं प्रभावी साधना की है। संघ का कार्य किसी व्यक्ति, सत्ता या राजनीतिक उद्देश्य पर आधारित न होकर समाज संगठन एवं राष्ट्र पुनर्निर्माण के ध्येय पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड है। एक ओर भारत विश्व मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के समक्ष अनेक सांस्कृतिक, वैचारिक एवं सामाजिक चुनौतियाँ भी उपस्थित हैं। ऐसे समय में समाज को संगठित, जागरूक एवं संस्कारित करने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ निरंतर कर रहा है।
श्री कानिटकर जी ने राष्ट्र निर्माण, सामाजिक संगठन, युवा जागरण एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी संस्कृति, परंपरा एवं संगठित समाज में निहित है। यदि समाज संगठित एवं जागरूक हो जाए तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं रह जाती। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम ने साधारण वानरों को संगठित कर एक विशाल शक्ति का निर्माण किया और उसी संगठन शक्ति के बल पर लंका विजय संभव हुई। यह उदाहरण आज भी समाज को एकता, अनुशासन एवं सामूहिक प्रयास की प्रेरणा देता है।
श्री कानिटकर ने छत्रपति शिवाजी महाराज की संगठन क्षमता एवं राष्ट्रभक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद समाज को संगठित कर विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष किया। वहीं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने समाज संगठन का कार्य प्रारंभ किया, जिसका उद्देश्य एक सशक्त एवं जागरूक राष्ट्र का निर्माण करना था, उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व भारत की सांस्कृतिक पहचान है और यह किसी संकीर्णता का नहीं, बल्कि समरसता, सहअस्तित्व एवं मानवता का विचार है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास, आत्मबोध एवं राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन एवं वैज्ञानिक दृष्टि विश्व को नई दिशा देने में सक्षम है।
श्री कानिटकर जी ने अपने उद्बोधन में विशेष रूप से “पाँच परिवर्तन” के विविध आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला और उन्हें वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु संघ पाँच प्रमुख विषयों पर विशेष बल दे रहा है —सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्य पालन।
उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है। जाति, वर्ग, भाषा या क्षेत्र के आधार पर समाज में विभाजन राष्ट्र की शक्ति को कमजोर करता है। समाज तभी सशक्त बनेगा जब प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान, आत्मीयता एवं अपनत्व का अनुभव करेगा।
कुटुंब प्रबोधन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। आज भौतिकतावाद एवं पाश्चात्य प्रभाव के कारण पारिवारिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है। यदि परिवार सुदृढ़ रहेगा तो समाज एवं राष्ट्र भी सुदृढ़ बने रहेंगे।
पर्यावरण संरक्षण के विषय में उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्रकृति-सम्मत जीवन शैली का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता एवं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को जन आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।
स्वदेशी जीवन शैली के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विचार केवल आर्थिक दृष्टि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। स्थानीय उत्पादों के उपयोग, भारतीय परंपराओं के सम्मान एवं स्वदेशी चिंतन के व्यवहारिक अनुसरण से राष्ट्र आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बन सकता है।
नागरिक कर्तव्य पालन पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि केवल अधिकारों की अपेक्षा पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का भी गंभीरता से पालन करना चाहिए। अनुशासन, संवेदनशीलता, सामाजिक सहभागिता एवं राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की भावना ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है।
युवाओं की भूमिका पर भी विशेष चर्चा करते हुए श्री कानिटकर जी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यही युवा शक्ति भारत के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी पूँजी है। यदि युवाओं को सही दिशा, संस्कार एवं सकारात्मक उद्देश्य प्राप्त हो जाए, तो भारत पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित हो सकता है। उन्होंने युवाओं से केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहकर समाज एवं राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण पर भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्ति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास एवं राष्ट्र चेतना का जागरण होना चाहिए। भारतीय शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान एवं संस्कार आधारित रही है और वर्तमान समय में भारतीयता एवं आधुनिकता के समन्वय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख नागरिकों ने आयोजन को अत्यंत सारगर्भित, प्रेरणादायी एवं समयानुकूल बताया। उपस्थित शिक्षाविदों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं ने कहा कि इस प्रकार के वैचारिक संवाद समाज में सकारात्मक चेतना, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करते हैं। समाज जीवन के विविध क्षेत्रों से जुड़े 438 प्रमुख नागरिकों की सक्रिय उपस्थिति एवं सहभागिता ने इस आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की। यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, सकारात्मक चिंतन एवं वैचारिक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ, क्योंकि समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, चिकित्सक, अधिवक्ता, उद्योग एवं व्यापार जगत से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता और युवाओं ने राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता से साबित किया ।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मोतिहारी जिले के सह जिला संघचालक श्री श्याम सुंदर राम जी ने आभार प्रकट करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि समाज जागरण, आत्मचिंतन एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक सशक्त करने का माध्यम है। उन्होंने सभी उपस्थित प्रमुख नागरिकों, अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाजहित एवं राष्ट्रहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।
इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक श्री रवि शंकर जी, श्री विजय जयसवाल जी, जिला प्रचारक श्री शिवम् सोनू जी, विभाग संपर्क प्रमुख रवि शंकर जी विभाग सह व्यवस्था प्रमुख जितेंद्र त्रिपाठी जी, कृष्ण कुमार जी, अरुण सिन्हा जी, सह जिला कार्यवाह मनोज कुमार कयाल जी, अरुण जी , अनुपम वर्मा जी, बसंत जायसवाल जी, शिवेंद्र जी, संजीव जी,अबोध जी , अरविन्द सर्राफ जी, अंगद जी, राजेश जी, सतीश चन्द दीपक जी, अभिषेक जी आदि का विशेष सहयोग रहा तथा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रमुख नागरिक व सज्जन वृन्द, शिक्षाविद, चिकित्सक, व्यवसायी, प्रशासनिक अधिकारी, युवा एवं प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







