लोकल डेस्क, एन के सिंह।
गोल्ड मेडलिस्ट असीम झा के अनुसार, श्रेष्ठ वकील वही है जो फीस से पहले केस की जटिलता और वास्तविकता को मुवक्किल के सामने स्पष्ट रखे।
पूर्वी चंपारण: न्याय की चौखट पर खड़ा हर व्यक्ति अक्सर एक ऐसी उम्मीद और विश्वास लेकर आता है, जहाँ उसकी वर्षों की मेहनत, संचित पूंजी और सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर होती है। अदालत के गलियारों में भटकते आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे 'सारथी' को चुनना है, जो उसे दलदल से बाहर निकाल सके। इसी विषय पर प्रकाश डालते हुए पूर्वी चंपारण सिविल कोर्ट के प्रतिष्ठित अधिवक्ता और नेशनल लॉ कॉलेज के गोल्ड मेडलिस्ट असीम झा, जिन्हें स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित कर चुके हैं, ने एक 'सफल और सच्चे वकील' को पहचानने के अचूक मंत्र साझा किए हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि एक गलत चुनाव न्याय की राह में अंधेरा भर सकता है, जबकि एक सही अधिवक्ता डूबती नैया को पार लगा सकता है।
मेडल की चमक और प्रधानमंत्री का सम्मान, असीम झा की कानूनी दृष्टि
असीम झा केवल कानूनी धाराओं के ज्ञाता नहीं हैं, बल्कि उनके पास वह दूरदर्शिता है जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व ने भी सराहा है। उनके अनुसार, कोर्ट की चहारदीवारी के भीतर एक वकील केवल एक कानूनी पेशेवर नहीं होता, बल्कि वह अपने मुवक्किल की सबसे मजबूत ढाल और विश्वास का केंद्र होता है। श्री झा कहते हैं कि न्याय पाने की यात्रा उसी क्षण सफल हो जाती है, जब पीड़ित व्यक्ति अपना हाथ एक सही और ईमानदार विशेषज्ञ के हाथ में सौंपता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अधिवक्ता की असली पहचान उसकी डिग्री से अधिक उसके सिद्धांतों और कार्यशैली से होती है।
ईमानदारी और पारदर्शिता, सफलता की पहली सीढ़ी
असीम झा ने आम जनता को आगाह करते हुए कहा कि एक बेहतरीन वकील की पहचान उसकी सच्चाई और पारदर्शिता से होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि उन अधिवक्ताओं से सदैव सावधान रहना चाहिए जो केवल मीठी बातें करते हैं या जीत का खोखला आश्वासन देते हैं। उनके अनुसार, "सच्चा वकील वह है जो फीस की चर्चा से पहले इंसाफ की बात करे।" एक योग्य अधिवक्ता आपको केस की जटिलता, उसमें लगने वाला संभावित समय और वास्तविक खर्च का विवरण पहले ही स्पष्ट कर देता है। पारदर्शिता ही वह बुनियाद है जिस पर मुवक्किल और वकील के बीच भरोसे का पुल बनता है।
अनुभव, संवाद कला और 'ट्रस्ट फैक्टर' का संगम
कानूनी लड़ाई में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि केस को सही दिशा देने की व्यवहारिक समझदारी और अनुभव ही जीत का आधार बनते हैं। श्री झा के अनुसार, मुवक्किल को अधिवक्ता के पिछले रिकॉर्ड और उनके काम करने के बारीकियों पर गौर करना चाहिए। इसके साथ ही, संवाद कला (Communication Skills) को उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण हथियार बताया। यदि एक वकील मीटिंग के दौरान आपकी बातों को ध्यान से सुनता है और तार्किक जवाब देता है, तो निश्चित रूप से वह अदालत में जज के सामने भी आपकी आवाज को उतनी ही मजबूती और सटीकता से रख पाएगा।
मानसिक सुकून, जब अधिवक्ता बन जाए सुरक्षा की गारंटी
असीम झा ने एक बहुत ही मार्मिक और गहरी बात कही: "सही वकील से मिलकर आपको डर नहीं, बल्कि मानसिक सुकून महसूस होना चाहिए।" उन्होंने सलाह दी कि तकनीकी ज्ञान अपनी जगह है, लेकिन 'ट्रस्ट फैक्टर' यानी भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यदि आप अपने वकील के पास बैठकर सुरक्षित और तनावमुक्त महसूस करते हैं, तो समझ लीजिए कि आप सही दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि मुवक्किल को कभी भी हड़बड़ी में फैसला नहीं लेना चाहिए, क्योंकि एक धैर्यवान और समझदार अधिवक्ता ही हारते हुए केस में भी न्याय की किरण जगाने का साहस रखता है।







