Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

सड़क हादसों में घायलों को कैशलेस इलाज, मददगारों को इनाम

स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।

पटना: सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है। अब राज्य की राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य उच्चपथों और ग्रामीण सड़कों पर होने वाले हादसों में पीड़ितों को अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। साथ ही घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को 25 हजार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा।

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक मान्य होगी। इलाज पर होने वाला खर्च केंद्र सरकार के दुर्घटना फंड से वहन किया जाएगा, जबकि बिहार सड़क सुरक्षा परिषद को इस योजना की नोडल एजेंसी बनाया गया है। अस्पतालों से समन्वय कर पीड़ितों को तुरंत लाभ दिलाने की व्यवस्था की जाएगी।

मंत्री ने बताया कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करने के लिए विशेष रणनीति पर काम किया जा रहा है। पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा जैसे दुर्घटना-प्रभावित जिलों में डीएम और एसपी के साथ समीक्षा बैठकें की जाएंगी। इसके अलावा निजी एंबुलेंस को सरकारी एंबुलेंस सेवा से जोड़ने का भी प्रस्ताव है, ताकि आपात स्थिति में समय की बर्बादी न हो।

उन्होंने कहा कि स्लीपर बसों के संचालन को लेकर भी सख्त अभियान चलाया जाएगा और मानकों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी। सरकार का लक्ष्य सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हादसों और मौतों की संख्या में कमी लाना है।

पिंक बसों में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

परिवहन मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पिंक बस सेवा को और मजबूत करने जा रही है। जल्द ही 250 महिला चालक और 250 महिला कंडक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। वर्तमान में आठ जिलों में 100 पिंक बसें संचालित हैं। गणतंत्र दिवस पर गांधी मैदान में परिवहन विभाग की झांकी में छह महादलित महिला चालक पिंक बस चलाती नजर आएंगी।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि औरंगाबाद स्थित आईडीटीआर से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिला चालकों को शीघ्र ही लाइसेंस जारी किए जाएंगे। साथ ही झारखंड, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से बेहतर संपर्क के लिए 149 नई इंटरस्टेट बसें शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है।