लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: संसार की हर वस्तु में अच्छाई और बुराई पाई जाती है।कुछ वस्तुएँ हमें इसलिए अच्छी लगती हैं क्योंकि हमें सुख मिलता।दूसरी कुछ वस्तुएँ इसलिए बुरी लगती हैं क्योंकि वे हमारी इच्छाओं में बाधक हैं परन्तु वास्तविकता इसके विपरीत है।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।वह हर वस्तु,जिसमें हमें केवल अच्छाई ही दिखाई देती है वो बुराई को भी छिपाए हुए है।हर बुरी दिखाई देने वाली वस्तु भी अच्छाई से भी पूर्ण है।सफलता सबको प्रिय है और असफलता सबको उदास कर देती है।परंतु वास्तव में सफलता से भी कुछ हानियाँ होती हैं और असफलता बहुत से कार्यों में हमारे लिए लाभकारी है।असफलता हमें हमारी भूलों पर विचार करने को विवश ही नहीं करती अपितु वास्तव में असफलता पूर्ण सफलता के लिए प्रयत्नों का मार्ग प्रशस्त करती है। असफलता का कारण सामान्यतः मनुष्य की स्वयं की कुछ निश्चित भूलें हैं।सामान्य मनुष्य अपनी असफलता का कारण स्वयं को छोड़ कर दूसरों को मानता है जबकि विवेकी मनुष्य ठीक उसके विपरीत भूलों का दोषी स्वयं को मान कर अपने ग़लतियाँ सुधारने का मार्ग ढूँढता है।असफलता कष्टकारक होते हुए भी चरित्र का निर्माण करने वाली है परंतु सफलता आनंदमयी होकर भी अहंकार नामक बुराई को छिपाए रहती है जो " सावधानी हटी दुर्घटना हुई " के आधार पर हानि करने का साधन बन जाती है।
अहंकार किसी भी कार्य में बाधक है,वह मनुष्य को वास्तविकता से दूर रखता है।इस प्रकार अहंकार और आत्म विश्वास कार्य से सम्बंधित होते हुए भी भिन्न है।आज का मनुष्य अपने को कर्ता समझ कर ऐंठ रहा है,अहंकार के नशे में चूर है तो इससे बड़ी नीचता ईश्वर के प्रति क्या हो सकती जो सृष्टि का पालनहार है। कर्ता न होकर कर्ता कहलाने की इच्छा करना ही अहंकार है।ईश्वर तो पल में पर्वत कोई राई कर सकता है।इंसान तो एक बुलबुला है।यदि इतना मात्र सोचना हमें आ जाय तो जीवन जीने की कला हमें समझ में आ जाएगी।







