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सही को सही एवं गलत को गलत कहना ही मानव धर्म: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: कर्म परछाईं की तरह सदा हमारे साथ रहते हैं, इसलिए श्रेष्ठ कर्म की शीतल छाया में चलें अर्थात श्रेष्ठ कर्म करें, क़ुदरत का कानून है, दुनिया में आप किसी को बेचैन करेंगे तो आप भी चैन सुकून से ज़िन्दगी नहीं गुजार पायेंगे।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।दौलत सिर्फ इंसान के रहन-सहन का तरीका बदल सकती है,पर बुद्धि,नीयत और तकदीर नहीं,अगर नए रिश्ते ना बने तो मलाल मत करें, पुराने टूट ना जाएं बस इतना ख्याल रखें, अकेले सफ़र करना पड़ता है इस जहाँ में।दोस्त और दुश्मन अक्सर कामयाबी के बाद ही बनते हैं।

मन में छुपाया हुआ कपट और पाप आँख में पड़े तिनके, पैर में घुसे हुए कांटे और रूई में दबी आग से भी ज्यादा भयानक होता है। शब्द मुफ्त में मिलते हैं,उनके चयन पर निर्भर करता है कि उनकी कीमत मिलेगी या चुकानी पड़ेगी। गन्ने में जहाँ गांठ होती है वहाँ,रस नहीं होता और जहाँ रस होता है वहाँ गांठ नहीं होती है। बस हमारा जीवन भी ऐसा ही होता है,इसलिये जीवन में संबंधो में हमेशा रस रखना है गांठ कभी नहीं पड़ेगी।

दुनिया में हर स्तर पर,हर क्षेत्र में गलत को सही साबित करने की जद्दोजहद भी तनाव का एक प्रमुख कारण है। सही को सही और गलत को गलत मानने का दृष्टिकोण यदि विकसित कर लिया जाए तो समस्याएं बहुत कम हो जाएंगी। इसमें सिर्फ दूसरों का ही नहीं खुद का विश्लेषण भी शामिल है,यदि मनुष्य का चित्त किसी कार्य में व्यस्त रहे तो चिन्ता का जन्म ही न हो सके, जीवन भी सरल हो जाएगा। खुले विचारों वाले लोग अपनी मान्यताओं को दूसरों पर नहीं थोपते,वे जीवन के सभी दृष्टिकोणों और वास्तविकताओं को स्वीकार करते हैं तथा बिना किसी निर्णय के शांतिपूर्वक अपना काम करते हैं।जीवन एक संपूर्ण पूर्ण पुस्तक है,इसके प्रत्येक पन्नों को उलट-उलट कर पढ़ना है और आनंद प्राप्त करना है।