नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधों के खिलाफ चल रहे अभियान में पूर्वी दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे शातिर संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है जो देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) मुहैया कराता था। इस मामले में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड विजय कुमार (31) के साथ-साथ प्रदीप कुमार (42), यतेंद्र कुमार (23), मुकेश (24), विनेश (37), गुरबाज सिंह (27), अमन (27), सूरज यादव (24), गौरव नाहर (22) और लक्ष्मण (33) को गिरफ्तार किया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत केरल की एक महिला के साथ हुई 2 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत से हुई। जब दिल्ली पुलिस ने इस राशि के लेन-देन (मनी ट्रेल) की जांच की, तो पाया कि ठगी की रकम एक निजी बैंक के 'म्यूल अकाउंट' में ट्रांसफर की गई थी। गहराई से जांच करने पर पता चला कि यह खाता एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जो जानबूझकर साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी दिलाने या अतिरिक्त पैसे कमाने का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। खाता खुलते ही आरोपी उनके एटीएम कार्ड, चेक बुक, और मोबाइल बैंकिंग क्रेडेंशियल्स अपने कब्जे में ले लेते थे और इन्हें साइबर अपराधियों को बेच देते थे। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से 11 पीओएस (POS) मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस उपायुक्त (पूर्व) राजीव कुमार ने बताया कि यह गिरोह न केवल खाते मुहैया कराता था, बल्कि पीओएस मशीनों के जरिए ठगी की रकम को निकालकर वित्तीय लेन-देन के निशानों को मिटाने की कोशिश भी करता था। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या ओटीपी साझा न करें, क्योंकि ऐसा करना उन्हें अनजाने में बड़े साइबर अपराध का हिस्सा बना सकता है। फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनसे जुड़े अन्य बैंक खातों की तलाश में जुटी है।







