लोकल डेस्क, राजीव कु. भारती ।
- सीवान व्यवहार न्यायालय के कायाकल्प की उम्मीद, अधिवक्ता प्रयाग कुमार ने विधि मंत्री को सौंपा 20 लाख रुपये सहायता का प्रस्ताव
सीवान व्यवहार न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं एवं वादकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अधिवक्ता प्रयाग कुमार ने राज्य के विधि मंत्री संजय कुमार ‘टाइगर’ से मुलाकात कर न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बैठने हेतु पक्का शेड, शुद्ध पेयजल, विद्युतीकरण तथा पार्किंग व्यवस्था के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव सौंपा।
मंत्री को दिए गए ज्ञापन में अधिवक्ता प्रयाग कुमार ने बताया कि सीवान व्यवहार न्यायालय में करीब 1500 अधिवक्ता कार्यरत हैं, जबकि प्रतिदिन हजारों की संख्या में वादकारी भी न्यायालय पहुंचते हैं। वर्तमान में परिसर में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, पेयजल एवं पार्किंग जैसी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण लोगों को भीषण गर्मी और बरसात के दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में उन्होंने चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त पक्का अधिवक्ता शेड (सिटिंग हॉल) का निर्माण, आरओ एवं वाटर कूलर के माध्यम से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, शेड में सुरक्षित विद्युतीकरण के साथ पंखे और एलईडी लाइट की सुविधा तथा वाहनों की सुव्यवस्थित पार्किंग के लिए पार्किंग शेड और लेआउट का निर्माण शामिल है।
विधि मंत्री संजय कुमार ‘टाइगर’ ने अधिवक्ता प्रयाग कुमार की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए न्यायालय परिसर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाएगा तथा विभागीय विशेष निधि अथवा मंत्री ऐच्छिक कोष से 20 लाख रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्राक्कलन (एस्टिमेट) तैयार करने का निर्देश देने की बात भी कही।
अधिवक्ता प्रयाग कुमार ने कहा कि यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो यह सीवान व्यवहार न्यायालय के विकास और अधिवक्ताओं की सुविधाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और विधि विभाग के सहयोग से न्यायालय परिसर में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं का निर्माण कार्य शुरू होगा।
इस पहल की जिले के अधिवक्ता समुदाय ने सराहना की है। अधिवक्ताओं का मानना है कि प्रस्ताव के क्रियान्वयन से न्यायालय परिसर की व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा और अधिवक्ताओं के साथ-साथ आम वादकारियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।







