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सुखी परिवार का ठोस आधार एक दूसरे का सम्मान: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल:ढ़ती हुई दूरियों से बचने के लिए पुरानी पीढ़ी का अनुभव और नईं पीढ़ी का बढ़ता हुआ ज्ञान दोनों का सामंजस्य करना अति आवश्यक है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

कई बार हमें मालूम होता है कि सामने वाला हमारे साथ चालाकियाँ कर रहा है लेकिन फिर भी हम सब देखते रहते हैं,क्योंकि वक़्त के साथ हमारे मन में ईश्वर पर भरोसा और भी मज़बूत होता जाता है,जानते हुए भी हम ये सोच कर निश्चिंत हो जाते हैं कि कोई हमारा बुरा तो चाह सकता है लेकिन बुरा कर नहीं सकता।जिस घर में बड़े "गरम" और छोटे "नरम" तो उस घर में है "शर्म", जिस घर के छोटे "गरम" ओर बड़े "नरम" तो वह घर हे "बेशर्म",जिस घर के बड़े "गरम" और छोटे भी "गरम" तो उस घर के फूटे "करम"अपशब्द एक ऐसी चिंगारी है,जो कानों में नहीं सीधा "मन" में आग लगाती है। "हमेशा मधुर बोलें"। सम्मान हमारे व्यक्तित्व का सबसे अहम् अंश है, ये एक निवेश की तरह है,जितना हम दूसरों को देते हैं वो हमें ब्याज सहित वापस मिलता है। ठीक उसी तरह-समय अच्छा हो तो आपकी गलती भी मजाक लगती है,और समय खराब हो तो आपका मजाक भी गलती बन जाती है।

झुके उतना जितना सही हो,बेवजह झुकना दूसरों के अहम् को बढ़ावा देता है। दूसरों के बारे में कही गई बातों के आधार पर उनका मूल्यांकन नहीं करना चाहिए क्योंकि किसी और द्वारा प्रस्तुत तथ्य भ्रामक या दुर्भावनापूर्ण भी हो सकते हैं इसलिए समझदारी से काम लें,उन्हें स्वयं जानें और फिर अपनी राय बनाएँ। किसी का अतीत जानकर उसक़े व्यक्तित्व का अनुमान नहीं लगाना चाहिए क्योंकि समय में वह शक्ति है,जो कोयले को भी हीरे में बदल सकता है।जो मिला है,उस में ही ख़ुश रहिए।अपनी उँगलियाँ ही सिखाती हैं कि,दुनिया में बराबर कोई नहीं है,संतुष्ट रहिए,ख़ुश रहिए।