लोकल डेस्क, ऋषि राज।
रक्सौल: मन प्रत्यक्ष देवता है,कल्पवृक्ष है,जिसका सदुपयोग करना आ गया तो व्यक्ति को मनचाहे फल की प्राप्ति हो सकती,लेकिन यदि मन साथ न दे,बिगड़ जाए या दुरुपयोग होने लगे तो यही मन एक बड़ा सरदर्द बन जाता है,दुश्मन की तरह व्यवहार करने लगता है और बर्बादी का कारण बनता है।
उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया। मन की अद्भुत शक्तियों में प्रमुख हैं - कल्पनाशक्ति,मनोबल एवं इच्छाशक्ति,जिनके बल पर उसके लिए असंभव जैसी कुछ भी चीज नहीं रह जाती,बस ठान लेने भर की देर होती है।इसके अभाव में कुंभकरण की तरह पड़ा व्यक्ति जीवन के बहुमूल्य पलों को यों ही बर्बाद करता रहता है और यदि मन की शक्तियाँ विषयभोग व राग-द्वेष में उलझ जाएँ,तो उसके जीवन को और दुःखमय व संतापग्रस्त बना देती हैं।
अतः सबसे पहले ध्यान देने योग्य यह मन ही है और यह हमारी सेवा का पहला हकदार है; क्योंकि यदि मन ठीक है,तो शेष सबका ठीक होना सुनिश्चित हो जाता है और यदि मन साथ नहीं दे,तो व्यक्ति जीती हुई बाजी भी हार जाता है और बिगड़ैल मन व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है।संसार में महापुरुषों की जीवनियों पर सूक्ष्म दृष्टि डालने पर स्पष्ट होता है कि अधिकांशतः उनकी परिस्थिति,साधन व योग्यता आदि सब औसत स्तर के थे,लेकिन उनमें एक ही विशेषता थी - उनका प्रचंड मनोबल।उन्होंने मन की शक्ति को पहचाना साथ ही इसलिए महान कार्य किए,जिन्हें सर्वसाधारण चमत्कारिक मानकर दांतों तले उंगली दबाने के लिए विवश होते हैं व उन्हें अनुकरणीय आदर्श मानते हैं।सारांश यही है कि जीवन की सर्वोत्तम औषधि स्वयं का मन का स्वस्थ होना है।







