नेशनल डेस्क : वेरॉनिका राय
हिस्ट्रीशीटर पर लगा साजिश का आरोप, आर्थिक प्रलोभन देकर झूठा आरोप लगाने की बात सामने आई
वाराणसी, । ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में सोमवार को नया मोड़ सामने आया, जब एक व्यक्ति ने सामने आकर दावा किया कि उसे आर्थिक प्रलोभन देकर शंकराचार्य पर झूठा आरोप लगाने के लिए उकसाया गया था। यह व्यक्ति वाराणसी पहुंचकर शंकराचार्य की शरण में आया और पत्रकारों के सामने अपनी बात रखी।
रमाशंकर दीक्षित, जो शाहजहांपुर के निवासी और पेशे से पत्रकार हैं, सोमवार शाम वाराणसी के केदारघाट स्थित श्री विद्या मठ पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर आशुतोष पाण्डेय ने उन्हें अपने सहयोगी के माध्यम से फोन कर शंकराचार्य पर झूठा यौन शोषण का आरोप लगाने के लिए कहा था।
रमाशंकर दीक्षित ने पत्रकारों को बताया, “आशुतोष पाण्डेय ने अपने एक सहयोगी के जरिए मुझसे संपर्क किया और कहा कि मैं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर आरोप लगाऊं कि उन्होंने उनकी छोटी बच्ची के साथ यौन शोषण किया है। इसके बदले में उन्होंने मुझे आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया।”
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रस्ताव उनके लिए चौंकाने वाला था और उन्होंने इस साजिश का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं एक पत्रकार हूं और सच के साथ खड़ा रहना मेरा कर्तव्य है। इसलिए मैंने इस साजिश का हिस्सा बनने के बजाय सच्चाई को सामने लाने का फैसला किया और शंकराचार्य जी की शरण में आकर पूरी बात बताई।”
इस घटनाक्रम के बाद श्री विद्या मठ में मौजूद संतों और समर्थकों ने इसे शंकराचार्य के खिलाफ रची गई साजिश करार दिया। मठ से जुड़े लोगों का कहना है कि शंकराचार्य की छवि को धूमिल करने के लिए जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इस मामले में आशुतोष पाण्डेय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस या प्रशासन की ओर से भी इस नए दावे पर तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि सच धीरे-धीरे सामने आ रहा है और इससे साजिश का पर्दाफाश होगा। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके।
इस बीच, रमाशंकर दीक्षित ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि आरोपों के पीछे कौन लोग शामिल हैं और उनका उद्देश्य क्या था।
फिलहाल, यह मामला धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है। सभी की निगाहें अब प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सके।







