स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।
- बीमारी के संकेत मिलते ही 10 मिनट में ईसीजी कराना है जरूरी
- राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जुटे हृदय रोग के विशेषज्ञ
- थ्रोम्बोलिसिस थेरेपी की बारीकी और मरीज के इलाज पर विशेषज्ञों ने दिया व्याख्यान
पटना। अगर किन्हीं व्यक्ति को रूटीन की दिनचर्या निपटाने के दौरान सीने में दर्द होती है या फिर चक्कर आने, पसीना छूटने या दम फूलने की शिकायत रहती है, तो इसकी बिल्कुल अनदेखी ना करें। यह हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। इस गंभीर बीमारी की शिकायत 40 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोग, अल्कोहल का सेवन या स्मोकिंग करने वालों के साथ-साथ बीपी, शुगर के मरीजों के अलावा जेनेटिक भी हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट
ये बातें शुक्रवार को राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ से गैर-संचारी रोग प्रभाग और ट्राइकॉग हेल्थ इंडिया की ओर से आयोजित एसटी-एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (स्टेमी) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेंगलुरु से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सीबी पाटिल ने कही। वह पालटिलपुत्रा के एक निजी होटल में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को बतौर प्रशिक्षक संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्टेमी के तहत मेडिकल, नॉन-कम्युनिकेबल डिसीज ऑफिसर्स एवं डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर्स को थ्रोम्बोलिसिस थेरेपी की बारीकियों और मरीज के इलाज को लेकर पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) के सहारे कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सीने के दर्द को न करें नजरअंदाज
डॉ. पाटिल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण मिलने पर 10 मिनट के भीतर ईसीजी कराएं। इसके बाद इलाज की आगे की प्रक्रिया को शुरू करें। हार्ट अटैक के मरीज को एस्टोकाइनेज नाम की दवा देने के बाद कम से कम एक घंटे तक डॉक्टर की निगरानी में रखना जरूरी है। बीमारी के संकेत मिलने पर मरीज के लिए एस्पिरिन की गोली को दांत से चबा-चबाकर खाना काफी फायदेमंद होगा। लोग इस गोली को अपने घर में भी रख सकते हैं। इसके साथ उन्होंने मरीजों के इलाज में काम आने वाली स्टैटिन समूह, प्रोप्रानोलॉल, स्ट्रेप्टोकाइनिज, इनेक्टीप्ले (इनोट्रोपिक) आदि दवाओं की खुराक और उसके सेवन की विधि से उपस्थित डॉक्टरों को रूबरू कराया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गैर-संचारी रोग प्रभाग के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. एके शाही ने कहा कि राज्य के सभी जिला अस्पताल, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ईसीजी मशीन उपलब्ध करा दी गई है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को हार्ट अटैक की संभावना होने पर ईसीजी के लिए प्रेरित करें। साथ ही जिन मरीजों में स्टेमी का खुलासा हो रहा है, उसके इलाज के प्रति गंभीर हों। इन मरीजों को डॉक्टर अपने संपर्क में रखें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग अगले चार से पांच महीने के भीतर सभी अस्पताल और दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में थ्रोम्बोलिसिस थेरेपी से संबंधित दवाएं उपलब्थ करा देगा। इस अवसर पर बेगलुरु से ही आए डॉ. एसएस अयंगर ने स्टेमी में प्राइमरी परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) और फार्माको-इनवेसिव रणनीति पर उपस्थित डॉक्टरों को कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने ऐसे मरीजों के लिए दवा निर्धारित करने की बारीकियों से भी रूबरू कराया।







