विदेश डेस्क, आर्या कुमारी |
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बदला रणनीतिक नजरिया : आईआरजीसी
तेहरान | ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक सीमित समुद्री मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र में बदल चुका है।
आईआरजीसी नौसेना के राजनीतिक उप प्रमुख मोहम्मद अकबरजादेह ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि हाल के क्षेत्रीय तनावों और संघर्षों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की रणनीतिक सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब इसे पारंपरिक संकीर्ण समुद्री गलियारे के बजाय विस्तृत परिचालन क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले इस जलडमरूमध्य को होर्मुज द्वीप के आसपास सीमित समुद्री मार्ग माना जाता था, लेकिन अब इसकी रणनीतिक सीमा जास्क तट से लेकर सिर्री द्वीप तक फैले बड़े समुद्री क्षेत्र को समाहित करती है।
अकबरजादेह के अनुसार, जो समुद्री गलियारा पहले करीब 32 से 48 किलोमीटर चौड़ा समझा जाता था, उसकी रणनीतिक परिधि अब बढ़कर लगभग 320 से 480 किलोमीटर तक मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह विस्तार क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य संचालन की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र किश्म द्वीप और ग्रेटर तुंब से आगे तक विस्तृत हो चुका है और अब एक “पूर्ण रणनीतिक चाप” का रूप ले चुका है। उनके मुताबिक, यह इलाका केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के आवागमन का मार्ग नहीं, बल्कि व्यापक सामरिक महत्व वाला समुद्री क्षेत्र बन गया है।
आईआरजीसी अधिकारी ने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास होने वाली सभी गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या ईरानी हितों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अब अधिक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। साथ ही ईरानी नौसैनिक बल क्षेत्र में सक्रिय रूप से तैनात हैं और किसी भी संभावित चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।







