नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर बड़ा बयान दिया है। केरल विधानसभा अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नेहरू भारत में लोकतंत्र की नींव रखने वाले नेता थे, लेकिन वे उनके अंधसमर्थक नहीं हैं। थरूर के मुताबिक, नेहरू की उपलब्धियों के साथ-साथ उनकी गलतियों को भी स्वीकार करना चाहिए।
शशि थरूर ने कहा कि वे नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी हर नीति से सहमत नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक नेता का मूल्यांकन आंख मूंदकर समर्थन या विरोध के आधार पर नहीं होना चाहिए। नेहरू ने कई ऐसे काम किए, जिनके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं, वहीं कुछ फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि आज की राजनीति में नेहरू को हर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति बढ़ गई है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि देश की हर चुनौती की जड़ नेहरू ही हैं। थरूर ने यह भी जोड़ा कि वे यह नहीं कहेंगे कि मौजूदा मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी है, लेकिन वह निश्चित तौर पर नेहरू विरोधी रवैया अपनाती रही है।
नेहरू की गलतियों का जिक्र करते हुए थरूर ने 1962 के भारत-चीन युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस समय लिए गए कुछ निर्णयों के लिए नेहरू की आलोचना की जा सकती है और उनसे इनकार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे योगदान को नकारना न्यायसंगत नहीं है।
कुल मिलाकर शशि थरूर ने कहा कि इतिहास को संतुलित दृष्टिकोण से देखना जरूरी है। न तो किसी नेता को देवता बनाना सही है और न ही हर मुद्दे के लिए उसे बलि का बकरा बनाना।







