लोकल डेस्क, मुस्कान कुमारी |
सीवान: बिहार के सीवान जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़कें अब मौत का जाल बन चुकी हैं। हुसैनगंज, आंदर, दरौंदा, भगवानपुर और बड़हरिया जैसे क्षेत्रों में वर्षों से टूट-फूट का शिकार ये सड़कें बारिश में पानी भरने से और भी खतरनाक हो जाती हैं। राहगीरों को हर कदम पर जान का जोखिम उठाना पड़ता है, जबकि विकास कार्यों की फाइलें अधिकारियों के बीच अटकी हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही से न सिर्फ दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ रही है।
ग्रामीण इलाकों में बदहाली का आलम दरौंदा प्रखंड के हड़सर जैसे गांवों में सड़कों की खस्ता हालत विकास की पोल खोल रही है। दरौंदा से हड़सर होते हुए हसनपुरा जाने वाली सड़क पूरी तरह जर्जर है। जलजमाव की समस्या इतनी गंभीर है कि ग्रामीणों का प्रशासन से भरोसा टूट रहा है। हल्की बारिश में भी सड़कें कीचड़ और गड्ढों से भर जाती हैं, जिससे वाहनों का फिसलना आम बात है। हाल ही में एक बाइक सवार गड्ढे में गिरकर घायल हो गया, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।2ef831 ग्रामीणों का कहना है कि सड़कें दो से तीन फीट गहरे गड्ढों से भरी हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं।
प्रशासन की सुस्ती, फाइलें अटकीं विकास कार्यों में देरी का मुख्य कारण अधिकारियों के बीच फाइलों का अटकना है। निविदा प्रक्रिया से लेकर निर्माण तक हर चरण में ब्यूरोक्रेटिक रुकावटें आ रही हैं। सीवान के सुरवाला पंचायत में बड़कागांव और मझवलिया जैसी जगहों पर सड़कें इतनी खराब हैं कि लोगों को आने-जाने में घंटों लग जाते हैं। जामो, जीरादेई, बसंतपुर और रघुनाथपुर की आंतरिक सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और बिगड़ जाती है, जहां पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता से सालों से ये समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
ओवरब्रिज की दयनीय स्थिति: 105 करोड़ का निवेश बर्बाद
सीवान के मलमलिया ओवरब्रिज की हालत तो और भी चौंकाने वाली है। मात्र डेढ़ साल में यह 105 करोड़ रुपये की लागत वाला पुल जर्जर हो गया है। निर्माण में भ्रष्टाचार की बू आ रही है, क्योंकि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद पुल की सतह उखड़ गई है और दरारें पड़ चुकी हैं। यह पुल जिले के महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का हिस्सा है, लेकिन अब यह राहगीरों के लिए खतरा बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, जो विकास योजनाओं में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करता है।
जलजमाव और दुर्घटनाओं का सिलसिला
सीवान के कई इलाकों में सड़कें साल भर जलमग्न रहती हैं। जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने से बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। हड़सर और आसपास के गांवों में ग्रामीणों को बाढ़ सहायता भी नहीं मिल पाई है, जबकि सड़कें जर्जर होने से दैनिक जीवन प्रभावित है। बारिश के दौरान खतरा और बढ़ जाता है, जहां गड्ढों में पानी भरने से वाहन फिसलते हैं। हाल के दिनों में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें बाइक सवारों को चोटें आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर कदम पर डर लगा रहता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई, लेकिन समस्या जस की तस
हालांकि प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं, जैसे गोपालगंज मोड़ से तरवारा तक सड़क किनारे से अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। दर्जनों दुकानें और निर्माण हटाए गए, लेकिन यह कार्रवाई मुख्य सड़कों तक सीमित रही। ग्रामीण क्षेत्रों की आंतरिक सड़कों पर अब भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। स्थानीय निवासियों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयां समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं, बल्कि निर्माण कार्यों को तेज करने की जरूरत है।
विकास की अधरझूल में लटकी योजनाएं
सीवान जिले में सड़क विकास की कई योजनाएं कागजों तक सिमट गई हैं। हुसैनगंज से लेकर बड़हरिया तक के इलाकों में सड़कें सालों से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ रहा है, क्योंकि किसान अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाते। दारौंदा जैसे प्रखंडों में सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि हल्की वर्षा में भी खतरा बढ़ जाता है। लोगों को सड़क बनने का इंतजार है, लेकिन प्रशासन की सुस्ती से निराशा बढ़ रही है।
ग्रामीणों की मांगें और उम्मीदें
स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि सड़कों की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए। जलजमाव रोकने के लिए नालियों का निर्माण और सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की जा रही है। हालांकि, फाइलों के अटकने से काम रुका हुआ है। सीवान के इन इलाकों में विकास कार्य अधर में लटके हैं, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।







