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सीरिया में आईएस ठिकानों पर अमेरिका का बड़ा सैन्य हमला

विदेश डेस्क- ऋषि राज

वॉशिंगटन:  अमेरिका ने सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए उसके कई ठिकानों पर एक साथ हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका की सेंट्रल कमांड के नेतृत्व में की गई, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सक्रिय आईएस नेटवर्क को कमजोर करना और भविष्य में होने वाले संभावित हमलों को रोकना बताया गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं ने मिलकर पूरे सीरिया में आईएस के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में आतंकी ठिकानों, हथियार डिपो और कमांड सेंटर्स को लक्ष्य बनाया गया।

सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई “ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व” के तहत की गई, जो सीरिया और इराक में आईएस के खिलाफ चलाया जा रहा दीर्घकालिक अभियान है। इस अभियान का मकसद आतंकी संगठन की जड़ों को खत्म करना, उसकी सैन्य क्षमता को नष्ट करना और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करना है।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह हमला 13 दिसंबर को सीरिया के पलमायरा क्षेत्र में हुए एक घातक आतंकी हमले की प्रतिक्रिया के तौर पर किया गया, जिसमें आईएस आतंकियों ने अमेरिकी और सहयोगी बलों को निशाना बनाया था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया था।

सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि ये हमले केवल प्रतिशोध नहीं हैं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की “लगातार प्रतिबद्धता” का हिस्सा हैं। बयान में कहा गया, “हमारा उद्देश्य आईएस को फिर से संगठित होने, हमले की योजना बनाने और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने से रोकना है। अमेरिका और उसके सहयोगी बल क्षेत्र में अपने सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।”

हालांकि, इन हमलों में मारे गए आतंकियों या हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। सीरिया की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई से आईएस को बड़ा झटका लगा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही आईएस की ताकत पहले की तुलना में कमजोर हुई हो, लेकिन वह अब भी छिटपुट हमलों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करता रहता है। ऐसे में अमेरिका की यह कार्रवाई संकेत देती है कि वॉशिंगटन सीरिया और मध्य पूर्व में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।