लोकल डेस्क, एन. के. सिंह।
पंजीकरण के माध्यम से भविष्य में पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, केसीसी ऋण और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी पाना आसान होगा।
पूर्वी चंपारण: कृषि विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में किसान रजिस्ट्री और ई-केवाईसी का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसी क्रम में आज जिहुली पंचायत में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को डिजिटल बुनियादी ढांचे से जोड़कर सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित करना है।
वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में संपन्न हुआ कार्य
शिविर का सफल संचालन सहायक तकनीकी प्रबंधक एवं प्रभारी कृषि समन्वयक अंगद कुमार यादव के नेतृत्व में किया गया। उनके साथ राजस्व कर्मचारी रितेश रंजन झा और स्थानीय किसान सलाहकार सतीश झा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि भारत सरकार द्वारा विकसित मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से किसानों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी भी बिचौलिए की भूमिका समाप्त हो जाएगी।
प्रमुख किसानों ने कराया पंजीकरण
शिविर के दौरान पंचायत के जागरूक किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुख्य रूप से गणेश जी, अशोक रावत, सियाराम सिंह, नीरज कुमार और परमेश्वर सिंह सहित दर्जनों किसानों ने अपना 'फार्मर ई-केवाईसी' और 'किसान रजिस्ट्री' का कार्य पूरा कराया। अधिकारियों ने मौके पर ही भू-लेख डेटाबेस (ROR) का सत्यापन कर किसानों के विवरण को ऑनलाइन अपडेट किया।
किसान रजिस्ट्री के लाभ
पोस्टर के माध्यम से विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान रजिस्ट्री बनवाने के कई दूरगामी फायदे हैं:
- आसान ऋण प्रक्रिया: भविष्य में फसल ऋण (KCC) और फसल बीमा का लाभ सुगम होगा।
- सीधा लाभ: पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्तों के लिए ई-केवाईसी और रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया गया है।
- तकनीकी सलाह: पंजीकृत किसानों को समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों द्वारा उचित सलाह और नए नवाचारों की जानकारी उनके मोबाइल पर प्राप्त होगी।
- सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता: बीज, खाद और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ सीधे खाते में प्राप्त होगा।
अधिकारियों की अपील
प्रभारी कृषि समन्वयक अंगद कुमार यादव ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि, "7 अप्रैल 2025 से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक किसान का सत्यापन अनिवार्य है। जो किसान इस शिविर में छूट गए हैं, वे जल्द से जल्द अपने पंचायत के किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक या प्रखंड कृषि पदाधिकारी से संपर्क कर अपना पंजीकरण पूर्ण करा लें।"







