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जकार्ता में भारतीय समुदाय को किये संबोधित, और ‘विकसित भारत 2047’ का रखे विजन : PM मोदी

विदेश डेस्क , रानी कुमारी

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय समुदाय के स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना की और भारत-इंडोनेशिया संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता को  दोहराई। इस अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच मित्रता का मजबूत आधार है और साझा विरासत, विश्वास तथा समुद्री संपर्क दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय द्वारा किए गए भव्य स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को लगातार मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को भारत का सच्चा मित्र और दूरदर्शी नेता बताते हुए उनके सहयोग की भी सराहना की।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सभ्यतागत, सांस्कृतिक और समुद्री संबंधों का उल्लेख किये । उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रिश्ते आज भी उतने ही मजबूत हैं। उन्होंने बाली यात्रा, वेसाक तीर्थयात्रा और नालंदा विश्वविद्यालय के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते जुड़ाव का जिक्र करते हुए बोले कि यह साझा विरासत भविष्य के सहयोग का मजबूत आधार बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विकास यात्रा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश ने बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत लगातार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत में हो रहे बदलाव 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और संकल्प का परिणाम हैं।

प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों से ‘विकसित भारत 2047’ और ‘इंडोनेशिया एमास 2045’ के लक्ष्यों को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और पूरे आसियान क्षेत्र की समृद्धि और विकास के लिए 'फोर्स मल्टीप्लायर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच दो हजार वर्षों से अधिक पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध आज भी दोनों देशों की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इंडोनेशिया में लगभग 1.5 लाख भारतीय मूल के लोग और करीब 15 हजार प्रवासी भारतीय रह रहे हैं, जो वहां के आर्थिक विकास, व्यापार और बहुसांस्कृतिक समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं।