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पटना हॉस्टल कांड: NEET छात्रा की मौत पर सनसनीखेज खुलासे, सिस्टम पर गंभीर आरोप

स्टेट डेस्क, वेरॉनिका राय ।

NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में SIT जांच पर भी उठे सवाल, परिवार ने CBI जांच की मांग की...

पटना। पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और फिर उसकी मौत के मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। छात्रा के पिता ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में न सिर्फ अस्पताल और हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि पुलिस की जांच पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि मौत से पहले उनकी बेटी ने अपनी मां को आपबीती बताई थी और बाद में पूरे मामले को दबाने के लिए उन्हें मुंहमांगी रकम का ऑफर दिया गया।

लगातार बढ़ते दबाव और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर उठे सवालों के बाद भले ही मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया हो, लेकिन पीड़ित परिवार अब भी संतुष्ट नहीं है। परिवार का साफ कहना है कि जांच चाहे पुलिस करे, SIT करे या CBI उन्हें सिर्फ और सिर्फ न्याय चाहिए।

“जांच सिर्फ लीपापोती है” : पिता

बातचीत में छात्रा के पिता ने कहा कि अब तक हुई जांच से वे बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा, “अब तक की जांच से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। जब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक मैं संतुष्ट नहीं हो सकता। पुलिस ने अब तक सिर्फ लीपापोती की है।” उन्होंने SIT की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक की कार्रवाई भरोसे लायक नहीं है।

डॉक्टर और हॉस्टल प्रबंधन पर हत्या का आरोप

पीड़िता के पिता ने डॉक्टर सतीश पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सौ फीसदी मिलीभगत से उनकी बेटी की हत्या की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि मनीष रंजन की गिरफ्तारी के बाद उसे तुरंत रिमांड पर क्यों नहीं लिया गया और क्यों जल्दबाजी में जेल भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक हॉस्टल संचालक की गिरफ्तारी नहीं होना बेहद संदेहास्पद है।

कैसे मिली बेटी की हालत की जानकारी

पिता ने बताया कि हॉस्टल संचालक ने फोन कर कहा कि उनकी बेटी की तबीयत अचानक खराब हो गई है और वे तुरंत पटना आएं।
उन्होंने कहा, “करीब सवा पांच बजे हमें सूचना मिली और हम छह बजे पटना के लिए निकल गए। पहले सहजानंद शर्मा के यहां भर्ती कराया गया, फिर कहा गया कि हालत गंभीर है और उसे दूसरी जगह ले जाएं। इसके बाद प्रभात हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।” जब परिवार साढ़े आठ बजे अस्पताल पहुंचा, तो छात्रा बेहोश और बेहद गंभीर हालत में थी।

कुछ देर के लिए आया होश, मां से कही दर्दनाक बात

पिता ने बताया कि अस्पताल में उनकी बेटी कुछ देर के लिए होश में आई थी। उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी ने उससे पूछा कि क्या तुम्हारे साथ कुछ गलत हुआ है? तो उसने सिर हिलाकर हां कहा और रोने लगी। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ ने जबरन हमें बाहर निकाल दिया।”

“जितना पैसा चाहिए, ले लो”

पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि अस्पताल और हॉस्टल प्रबंधन ने मिलकर उन्हें धमकाया और रिश्वत की पेशकश की। उन्होंने कहा, “हमें कहा गया कि औकात दिखा देंगे। हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल अस्पताल आईं और बोलीं—जितना पैसा चाहिए, उतना ले लो और केस मैनेज कर लो। लेकिन हमने साफ मना कर दिया।”

न्याय की मांग, दोषियों को फांसी की अपील

पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी का डॉक्टर बनने का सपना अब टूट चुका है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी अब लौटकर नहीं आएगी, लेकिन हमें न्याय चाहिए। दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।”