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पूर्व जज काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ के गठन का किया ऐलान

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने देश में एक नए राजनीतिक दल ‘इश्क करो पार्टी’ (आईकेपी) के गठन की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह पहल किसी प्रकार का मजाक या प्रतीकात्मक अभियान नहीं, बल्कि देश के सामने मौजूद गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने का एक गंभीर प्रयास है। पार्टी के गठन के साथ ही सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया गया है तथा संगठन के विभिन्न पदों पर नियुक्तियां भी की जा चुकी हैं।

मार्कंडेय काटजू ने कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, बाल कुपोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। उनका मानना है कि देश की बड़ी आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है और इन समस्याओं के समाधान के लिए एक व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के सरोकारों को केंद्र में रखकर काम करेगी और सामाजिक न्याय तथा समान अवसरों की दिशा में प्रयास करेगी।

पूर्व न्यायाधीश ने सदस्यता को लेकर भी विशेष शर्त का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 44 वर्ष की आयु पूरी कर चुके व्यक्ति पार्टी से जुड़ सकते हैं। उन्होंने इच्छुक लोगों से पार्टी अध्यक्ष इरफान अली से संपर्क करने की अपील करते हुए कहा कि विचारों में सहमति होने पर उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं। काटजू ने कहा कि पार्टी का विस्तार देशभर में करने की योजना बनाई जा रही है।

काटजू ने पार्टी के नाम को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘इश्क करो पार्टी’ के नाम को केवल रोमांस या वैलेंटाइन डे जैसी अवधारणाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि ऐसा सोचना पूरी तरह गलत है। उनके अनुसार, यहां ‘इश्क’ का अर्थ समाज के सभी वर्गों के प्रति प्रेम, सम्मान और भाईचारे की भावना से है, जो एक बेहतर और समावेशी समाज की नींव बन सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत इस समय अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। व्यापक गरीबी, बढ़ती बेरोजगारी, बच्चों में कुपोषण की समस्या, आम लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें तथा जातीय और सांप्रदायिक तनाव जैसी समस्याएं देश के विकास में बड़ी बाधा हैं। उनका कहना है कि इन मुद्दों का समाधान केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि समाज में व्यापक एकजुटता और जागरूकता से भी संभव है।

काटजू ने कहा कि ‘इश्क करो पार्टी’ का लक्ष्य लोगों के बीच प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जाति, धर्म, नस्ल या अन्य किसी भी आधार पर भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों के प्रति समान सम्मान और अपनापन होना चाहिए। उनके अनुसार, इसी सोच के साथ जनता को संगठित कर सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में प्रभावी संघर्ष किया जा सकता है।

पूर्व न्यायाधीश ने यह भी कहा कि देश की कई समस्याओं की जड़ सामाजिक विभाजन में छिपी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वार्थी राजनीति के कारण समाज को जातीय, सांप्रदायिक और अन्य आधारों पर बांटने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उनका कहना है कि जब तक समाज में वास्तविक एकता स्थापित नहीं होगी, तब तक गरीबी, बेरोजगारी और अन्य बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसी उद्देश्य को लेकर ‘इश्क करो पार्टी’ जनता के बीच अपनी विचारधारा और कार्यक्रमों को लेकर आगे बढ़ेगी।