Ad Image
Ad Image
असम में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई 30 के दोनों पायलट शहीद: वायु सेना प्रवक्ता || JDU की बैठक में निशांत के नाम पर लग सकती है नीतीश कुमार की मुहर || आज शाम JDU की अहम बैठक: अटकलों पर लगेगा विराम, तस्वीर होगी साफ || नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद आज शाम 5 बजे बुलाई JDU की बैठक || कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए सिंघवी समेत 6 उम्मीदवारों की घोषणा की || बिहार में सियासी तूफान तेज: नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा || प. एशिया युद्ध संकट से शेयर बाजारों में भारी गिरावट जारी || समस्तीपुर: दो लाख के ईनामी जाली नोट कारोबारी को NIA ने किया गिरफ्तार || AIR इंडिया आज यूरोप, अमेरिका के लिए फिर से शुरू करेगी विमान सेवा || नागपुर: SBL एनर्जी विस्फोट में 18 की मौत, 24 से ज्यादा घायल

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

भीलवाड़ा: मां ने नवजात को झाड़ी में फेंका, कुत्तों ने नोच खाया

क्राइम डेस्क, प्रीति पायल |

यह खबर राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से आई है, जो 26 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। यह घटना बेहद दर्दनाक और स्तब्ध करने वाली है।

  • स्थान: भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा थाना क्षेत्र स्थित नानोदिया गांव।
  • घटना: एक क्रूर मां ने अपने नवजात शिशु को सड़क के किनारे झाड़ियों में फेंक दिया। बच्चे को कपड़ों में लपेटा हुआ या प्लास्टिक में डाला गया था।
  • परिणाम: झाड़ियों में पड़े नवजात पर आवारा कुत्तों ने हमला बोल दिया। कुत्तों ने उसे बुरी तरह नोच लिया, जिससे बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
  • बचाव प्रयास: स्थानीय ग्रामीणों या राहगीरों ने शिशु को देखकर सूचना दी। 108 एम्बुलेंस ने उसे अस्पताल ले जाया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की भूमिका: शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और जांच तेजी से चल रही है। मां की पहचान या गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई, लेकिन जांच जारी है। यह घटना शायद अवैध प्रसव या सामाजिक दबाव से जुड़ी लग रही है।

यह अमानवीय कृत्य पूरी मानवता को शर्मिंदा करता है। इससे नवजात सुरक्षा, मां की मानसिक हालत और आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर गंभीर सवाल उठते हैं। कई चैनलों ने इसे प्रमुखता से दिखाया। अगर समय रहते बच्चे को बचाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा न हो सका। ऐसी घटनाओं के पीछे अक्सर पारिवारिक-सामाजिक दबाव या गरीबी जिम्मेदार होती है।