Ad Image
Ad Image
असम में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई 30 के दोनों पायलट शहीद: वायु सेना प्रवक्ता || JDU की बैठक में निशांत के नाम पर लग सकती है नीतीश कुमार की मुहर || आज शाम JDU की अहम बैठक: अटकलों पर लगेगा विराम, तस्वीर होगी साफ || नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद आज शाम 5 बजे बुलाई JDU की बैठक || कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए सिंघवी समेत 6 उम्मीदवारों की घोषणा की || बिहार में सियासी तूफान तेज: नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा || प. एशिया युद्ध संकट से शेयर बाजारों में भारी गिरावट जारी || समस्तीपुर: दो लाख के ईनामी जाली नोट कारोबारी को NIA ने किया गिरफ्तार || AIR इंडिया आज यूरोप, अमेरिका के लिए फिर से शुरू करेगी विमान सेवा || नागपुर: SBL एनर्जी विस्फोट में 18 की मौत, 24 से ज्यादा घायल

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

मोकामा: अनंत सिंह को हाईकोर्ट से मिली राहत, दुलारचंद हत्याकांड में क्लीन चिट

स्टेट डेस्क, एन के सिंह।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 'एक्सीडेंटल' मौत की पुष्टि के बाद बदला मामले का रुख।

पटना/मोकामा: बिहार की राजनीति में 'बाहुबली' के नाम से मशहूर और मोकामा के मौजूदा विधायक अनंत सिंह उर्फ 'छोटे सरकार' के लिए गुरुवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। पटना उच्च न्यायालय ने पूर्व राजनेता दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए अनंत सिंह को जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद आज उनके बेउर जेल से रिहा होने की पूरी संभावना है, जिससे मोकामा की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

न्यायालय का सम्मान और आत्मसमर्पण

यह मामला 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान का है। चुनाव के तनावपूर्ण माहौल में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की एक संदिग्ध घटना में मौत हो गई थी। घटना के बाद अनंत सिंह पर चुनावी रंजिश और हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि, कानून का सम्मान करते हुए विधायक ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा पासा

जांच के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि 30 अक्टूबर 2025 को भादौर थाना क्षेत्र के तरतार गांव के पास दुलारचंद यादव को पहले गोली मारी गई और फिर वाहन से कुचला गया। लेकिन मामले में नया मोड़ तब आया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मृत्यु हृदय और फेफड़ों में 'कठोर और कुंद पदार्थ' से लगी चोट के कारण हुए सदमे से हुई थी, जो एक 'एक्सीडेंटल' (दुर्घटना) घटना की ओर इशारा करती है। इसी आधार पर बचाव पक्ष ने इसे हत्या के बजाय एक हादसा करार दिया।
 

जेल में रहकर भी कायम रहा 'मोकामा का किला'

अनंत सिंह की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले में जेल में बंद होने के बावजूद उन्होंने चुनावी मैदान फतह किया। उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे से चुनाव लड़ते हुए आरजेडी की उम्मीदवार वीना सिंह को 28,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी। यह जीत इस बात का प्रमाण थी कि 1990 से मोकामा की सीट पर सिंह परिवार का जो वर्चस्व रहा है, वह आज भी बरकरार है।
 

अदालत की सख्त शर्तें

न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की अदालत ने 15,000 रुपये के मुचलके पर जमानत मंजूर करते हुए चार मुख्य शर्तें रखी हैं:
 याचिकाकर्ता को मुकदमे की हर तारीख पर अदालत में उपस्थित होना होगा।
बिना ठोस कारण के लगातार दो तारीखों पर अनुपस्थित रहने पर जमानत रद्द हो सकती है।
विधायक साक्ष्यों  के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

किसी भी गवाह को डराने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं की जाएगी।

वकीलों की जिरह: 27 बनाम 51 मामले

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने उनकी जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि उनके खिलाफ 27 आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं, अनंत सिंह के वकील ने पलटवार करते हुए कहा कि कुल 51 मामलों में से अधिकतर में वे या तो बरी हो चुके हैं या फैसले उनके पक्ष में आए हैं। वकील ने दलील दी कि घटनास्थल से कोई कारतूस बरामद नहीं हुआ और न ही किसी चश्मदीद ने उनके खिलाफ बयान दिया, जिससे स्पष्ट है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित था।
अब जब अनंत सिंह वापस अपने क्षेत्र में लौट रहे हैं, तो समर्थकों में भारी उत्साह है। 2022 में अयोग्य ठहराए जाने के बाद जिस बागडोर को उन्होंने अपनी पत्नी नीलम देवी को सौंपा था, अब वह एक बार फिर सीधे तौर पर जनता के बीच सक्रिय नजर आएंगे।