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युद्ध नहीं, योग ही दुनिया की समस्याओं का समाधान : रामदेव

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) : योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक तनाव और संघर्षों के दौर में दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि योग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि योग, ध्यान और प्राणायाम मानवता को शांति, संतुलन और स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखाते हैं तथा यह किसी धर्म, जाति या पंथ की सीमाओं में बंधा विषय नहीं है। विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को यहां आयोजित एक योग शिविर में उन्होंने यह बात कही।

रामदेव ने दुनिया के विभिन्न देशों के बीच चल रहे संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत सभी प्रमुख वैश्विक नेताओं को योग अपनाने की जरूरत है। उनका कहना था कि यदि विश्व नेतृत्व योग को अपने जीवन का हिस्सा बना ले तो कई तनाव और विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।

योग शिविर को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि अनुशासित और संतुलित जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। योग मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने से बुरी आदतों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से स्वतः मुक्ति मिल सकती है तथा समाज में सकारात्मक बदलाव का वातावरण तैयार होता है।

उन्होंने कहा कि योग को वैश्विक जनआंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है ताकि ‘योगधर्म’ को ‘युगधर्म’ बनाया जा सके। उनके अनुसार यदि दुनिया योग के मूल्यों को स्वीकार कर ले तो अनेक सामाजिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि योग मानव स्वास्थ्य और कल्याण का विषय है, जिसका किसी विशेष धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है।

रामदेव ने मीडिया से भी योग के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनसंचार के सभी मंचों पर योग को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब देश के लोग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होंगे, तब भारत पुनः अपने गौरवशाली स्थान को प्राप्त कर सकेगा।

उन्होंने कहा कि वैचारिक गुलामी ने भारत की प्रगति को प्रभावित किया है और विभिन्न क्षेत्रों में आत्मविश्वास तथा स्वदेशी सोच को बढ़ावा देने की जरूरत है। शिक्षा, चिकित्सा और शासन व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में स्वतंत्र एवं भारतीय दृष्टिकोण को अपनाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भारत कभी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता था और देश को फिर से उसी दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

योग गुरु ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण उत्सव बताते हुए कहा कि समाज को इसके मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने योग दिवस का विरोध करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी सोच प्रकृति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विपरीत है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। भारत की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रिकॉर्ड समय में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस वर्ष देश के मुख्य योग दिवस समारोह का आयोजन कोलकाता में किया जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी योगाभ्यास कार्यक्रम में भाग लेंगे।