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योग स्वास्थ्य और संस्कारों का आजीवन निवेश : राधाकृष्णन

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

लेह (लद्दाख) : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर लोगों से योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, मानसिक संतुलन और मजबूत चरित्र निर्माण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग में किया गया निवेश व्यक्ति को जीवनभर सकारात्मक परिणाम प्रदान करता है।

12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को स्पितुक स्टेडियम में आयोजित विशेष योग कार्यक्रम में भाग लेते हुए उपराष्ट्रपति ने विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, विद्यार्थी, सुरक्षाबलों के जवान और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्री राधाकृष्णन ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और अमूल्य विरासत है, जिसने आज पूरी दुनिया में अपनी उपयोगिता और प्रभावशीलता साबित की है। उन्होंने कहा कि योग शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ मानसिक शांति, आत्मविश्वास और अनुशासन को भी मजबूत करता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी चुनौतियों, तनाव और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ, ऊर्जावान और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है तथा उसे सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग केवल रोगों से बचाव का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग के माध्यम से आत्मसंयम, धैर्य, सहनशीलता और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है, जो समाज और राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक हैं।

उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए, तो वह शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक सक्षम बन सकती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक युवा ही विकसित भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।

कार्यक्रम के अंत में श्री राधाकृष्णन ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन से जुड़े सभी प्रतिभागियों और आयोजकों की सराहना की तथा लोगों से स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन के लिए योग को नियमित रूप से अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति के स्वास्थ्य, कल्याण और श्रेष्ठ चरित्र निर्माण के लिए एक ऐसा आजीवन निवेश है, जिसका लाभ पूरे जीवनभर मिलता है।