स्टेट डेस्क , रानी कुमारी |
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय जॉसेफ ने मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर एक निर्णय लागू किये है। राज्य सरकार ने मंदिर निधियों से संचालित की जा रही 245 करोड़ रुपये की 46 व्यावसायिक परियोजनाओं को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि मंदिरों की आय का उपयोग मुख्य रूप से मंदिरों के विकास, संरक्षण, धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर किया जाना चाहिए ।
जिन परियोजनाओं को रद्द किया गया है उनमें विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक निर्माण कार्य शामिल थे। इन परियोजनाओं के माध्यम से मंदिरों की संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने की योजना थी। नए निर्णय के बाद मंदिरों से प्राप्त धनराशि को धार्मिक महत्व के कार्यों, मंदिर परिसरों के रखरखाव, जीर्णोद्धार, सुरक्षा व्यवस्था, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों पर खर्च करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई राशि का उपयोग उनकी धार्मिक आस्था और मंदिरों के संरक्षण से जुड़े कार्यों में होना चाहिए। इसी सोच के तहत व्यावसायिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई और कई प्रस्तावों को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
यदि मंदिरों की आय का बड़ा हिस्सा सीधे धार्मिक और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों में लगाया जाता है तो इससे मंदिरों की आधारभूत संरचना मजबूत होगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं कुछ आर्थिक जानकारों का मत है कि व्यावसायिक परियोजनाओं से होने वाली संभावित आय को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए इस विषय पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।







