नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के तहत NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा रविवार 21 जून 2026 को देशभर के 5440 परीक्षा केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर संपन्न हुई। इस परीक्षा में 20 लाख से अधिक मेडिकल aspirants ने हिस्सा लिया। परीक्षा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोई बड़ी घटना नहीं हुई, हालांकि कुछ स्थानों पर देरी से पहुंचने वाले दो छात्रों को प्रवेश नहीं मिला।
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की सटीक संख्या NTA ने अभी घोषित नहीं की है, लेकिन यह मई में हुए रद्द परीक्षा के 22.05 लाख अभ्यर्थियों से कम रही। NTA ने परीक्षा के सुचारू आयोजन के लिए 7 लाख अधिकारियों, पुलिस टीमों, पर्यवेक्षकों और स्टाफ को तैनात किया। दिल्ली में NTA मुख्यालय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
परीक्षा का आयोजन और अभ्यर्थियों की चुनौतियां
परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चली। दिव्यांग अभ्यर्थियों को 6:20 बजे तक अतिरिक्त समय दिया गया। 13 भाषाओं में आयोजित परीक्षा में फिजिक्स सेक्शन को अभ्यर्थियों ने सबसे कठिन बताया, जबकि केमिस्ट्री मध्यम और बायोलॉजी NCERT आधारित थी। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता से लौटकर एयरपोर्ट पर इंतजार किया ताकि यातायात प्रतिबंध से अभ्यर्थी प्रभावित न हों। कोलकाता में एक दुर्घटना में घायल अभ्यर्थी श्रिष्टि दुबे को अलग कमरा और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई
परीक्षा केंद्रों पर आधार बायोमेट्रिक, फेस ऑथेंटिकेशन, CCTV, जामर और दो स्तर की तलाशी की गई। 1,38,560 CCTV कैमरे और 51,311 जामर लगाए गए। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, डाक विभाग, आईएएफ समेत कई विभागों की मदद ली गई। गुजरात में 79,400 अभ्यर्थी 211 केंद्रों पर परीक्षा दी। राजस्थान के अजमेर में बुर्का पहनी एक अभ्यर्थी को शुरुआती विवाद के बाद प्रवेश दिया गया। भोपाल में दुर्घटना में देर से पहुंचे दो छात्रों को प्रवेश नहीं मिला। NTA ने सभी व्यवस्थाओं को पारदर्शी बताया।
अभ्यर्थियों और परिवारों पर पड़ा असर
पुनर्परीक्षा ने कई अभ्यर्थियों के लिए शैक्षणिक, आर्थिक और मानसिक चुनौतियां बढ़ाईं। कुछ छात्रों को केंद्र तक पहुंचने में परिवहन की दिक्कत हुई। कई राज्यों में छात्रों और अभिभावकों के लिए पानी, छाया, भोजन और फ्री परिवहन की व्यवस्था की गई। परीक्षा में शामिल होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों सहित 10,000 से अधिक विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए विशेष इंतजाम किए गए। इस पुनर्परीक्षा से छात्रों के भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है, हालांकि कई परिवारों में तनाव बना रहा।







