नेशनल डेस्क,श्रेयांश पराशर l
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आयुष मंत्रालय के अधीन आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) को निजी क्षेत्र को बेचने का फैसला कर लिया है। इस रणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार को करीब 121 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। सरकार ने कंपनी की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में बताया गया कि यह विनिवेश दो चरणों वाली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और सलाहकार आधारित प्रणाली को अपनाया गया ताकि सौदे में निष्पक्षता बनी रहे। मंत्रालय के अनुसार, निजी कंपनी ने आईएमपीसीएल की पूरी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 121 करोड़ 94 हजार 400 रुपये की बोली लगाई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
आईएमपीसीएल आयुर्वेद और यूनानी दवाओं के निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत एक प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम रहा है। कंपनी आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में संचालित होती थी। सरकार का कहना है कि विनिवेश नीति के तहत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि निजी क्षेत्र के आने से कंपनी के संचालन और उत्पादन क्षमता में सुधार हो सकता है। वहीं, विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए कहा है कि सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से कर्मचारियों के भविष्य और सरकारी नियंत्रण पर असर पड़ सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि विनिवेश प्रक्रिया में सभी नियमों और पारदर्शी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। अब इस सौदे के बाद आईएमपीसीएल का संचालन पूरी तरह निजी क्षेत्र के हाथों में चला जाएगा।







