विदेश डेस्क, ऋषि राज |
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच ईरान युद्ध और जी-7 शिखर सम्मेलन से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
विवाद तब गहराया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर आरोप लगाया कि फ्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने कई बार उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने और निजी बातचीत की इच्छा जताई थी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य रणनीति के दौरान इटली ने अपने कुछ सैन्य अड्डों और हवाई पट्टियों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिससे अभियान प्रभावित हुआ।
इटली की प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रंप के इन बयानों को “भ्रामक और अतिरंजित” बताया। मेलोनी ने कहा कि इटली ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति प्रक्रिया का समर्थन किया है तथा किसी भी सैन्य कार्रवाई में भागीदारी राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ व्यक्तिगत टकराव नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के भीतर ईरान नीति को लेकर बढ़ते मतभेदों का संकेत है। जी-7 देशों के बीच एकजुटता बनाए रखना इस समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब पश्चिम एशिया में संघर्ष गहराता जा रहा है।
इस घटनाक्रम का असर आगामी अंतरराष्ट्रीय बैठकों और अमेरिका-यूरोप संबंधों पर भी पड़ सकता है। इटली यूरोपीय संघ का प्रमुख सदस्य है और उसकी विदेश नीति का प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय रणनीति पर पड़ता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप और मेलोनी के रिश्ते पहले काफी मजबूत माने जाते थे, लेकिन मौजूदा बयानबाजी ने इस साझेदारी में दरार के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।







