नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर दुनिया के कई देश लगातार अपनी चिंता और प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और प्रभावी रुख सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे हैरान करने वाली स्थिति बताते हुए कहा कि इतने गंभीर मानवीय संकट पर भारत की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देनी चाहिए।
शनिवार को एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित अपने लेख में श्रीमती गांधी ने गाजा में लगातार बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा मानवीय मूल्यों, न्याय और शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में सरकार की चुप्पी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उनका कहना था कि ऐसे समय में भारत को अपने नैतिक दायित्वों के अनुरूप स्पष्ट, संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
श्रीमती गांधी के लेख का समर्थन करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार की वर्तमान विदेश नीति के कारण भारत अपने पारंपरिक सहयोगियों फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के कई देशों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति प्रभावित हुई है और देश वैश्विक जनमत से अलग-थलग पड़ता दिखाई दे रहा है।
श्री खरगे ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर कहा कि श्रीमती गांधी का लेख मोदी सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि फलस्तीनी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों पर हो रहे हमलों के बीच भारत की चुप्पी न तो नैतिक दृष्टि से उचित है और न ही तर्कसंगत। उनके अनुसार राष्ट्रीय भावना और राष्ट्रीय हित दोनों ही यह अपेक्षा करते हैं कि भारत गाजा में इजरायली कार्रवाई तथा पश्चिमी तट में बड़ी संख्या में फलस्तीनी परिवारों के विस्थापन के मुद्दे पर स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाए।
राहुल गांधी ने भी श्रीमती गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में भारत धीरे-धीरे अपने रणनीतिक दायरे से पीछे हटता दिखाई दे रहा है, जबकि दुनिया के अनेक देश इस मुद्दे पर इजरायल से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इजरायल यात्रा भविष्य में एक ऐसे रणनीतिक निर्णय के रूप में देखी जा सकती है, जिस पर लंबे समय तक चर्चा होगी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि भारत की मूल राष्ट्रीय भावना हमेशा शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि संघर्ष से प्रभावित फलस्तीनी नागरिकों, विशेषकर बच्चों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और उनके पक्ष में आवाज उठाना भारत की नैतिक जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने कहा कि श्रीमती गांधी ने अपने लेख के माध्यम से भारत से स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को पुनर्जीवित करने, मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा गाजा के मुद्दे पर नैतिक स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखने का आह्वान किया है।







