विदेश डेस्क, ऋषि राज |
बीजिंग: चीन से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने पुराने और बेकार पड़े सिम कार्ड का इस्तेमाल कर करीब 26 लाख रुपये के सोने की अवैध खरीद-फरोख्त कर ली। इस अनोखे लेकिन गंभीर साइबर-आर्थिक अपराध ने न केवल स्थानीय प्रशासन को चौंका दिया है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और सिम कार्ड प्रबंधन पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, आरोपी व्यक्ति ने कई वर्षों पहले बंद हो चुके सिम कार्ड को दोबारा एक्टिव कर लिया। यह सिम कार्ड पहले किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था, लेकिन लंबे समय से निष्क्रिय रहने के कारण उस पर किसी का ध्यान नहीं था। आरोपी ने तकनीकी खामियों का फायदा उठाते हुए इस सिम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ई-वॉलेट से लिंक कर दिया। इसके बाद उसने डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए धीरे-धीरे बड़ी रकम इकट्ठा की।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने इस सिम कार्ड के जरिए फर्जी ओटीपी, वेरिफिकेशन कॉल और मैसेज का इस्तेमाल कर कई अकाउंट्स तक पहुंच बनाई। इसके बाद उसने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश दिखाते हुए करीब 26 लाख रुपये मूल्य का सोना खरीदा। यह सोना बाद में अलग-अलग माध्यमों से बेच दिया गया, जिससे आरोपी को मोटा मुनाफा हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट कंपनी ने संदिग्ध लेनदेन की सूचना साइबर सुरक्षा एजेंसियों को दी। जांच एजेंसियों ने जब ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया, तो पूरा नेटवर्क सामने आ गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, जहां उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
चीन की साइबर पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि डिजिटल पहचान की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे पुराने या बंद सिम कार्ड को औपचारिक रूप से डिएक्टिवेट करवाएं और अपने डिजिटल अकाउंट्स की नियमित जांच करते रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना बताती है कि तकनीक के साथ-साथ साइबर अपराध भी नए और खतरनाक रूप ले रहे हैं। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो डिजिटल सिस्टम पर आम लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। इस घटना के बाद चीन में सिम कार्ड नियमों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की निगरानी को और सख्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है।







