Ad Image
Ad Image
असम में दुर्घटनाग्रस्त सुखोई 30 के दोनों पायलट शहीद: वायु सेना प्रवक्ता || JDU की बैठक में निशांत के नाम पर लग सकती है नीतीश कुमार की मुहर || आज शाम JDU की अहम बैठक: अटकलों पर लगेगा विराम, तस्वीर होगी साफ || नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद आज शाम 5 बजे बुलाई JDU की बैठक || कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए सिंघवी समेत 6 उम्मीदवारों की घोषणा की || बिहार में सियासी तूफान तेज: नीतीश कुमार जाएंगे राज्यसभा || प. एशिया युद्ध संकट से शेयर बाजारों में भारी गिरावट जारी || समस्तीपुर: दो लाख के ईनामी जाली नोट कारोबारी को NIA ने किया गिरफ्तार || AIR इंडिया आज यूरोप, अमेरिका के लिए फिर से शुरू करेगी विमान सेवा || नागपुर: SBL एनर्जी विस्फोट में 18 की मौत, 24 से ज्यादा घायल

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

जन्म व मृत्यु ही पूर्णतः सत्य हैं: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: इस दृश्यमान जगत् में जन्म-मरण का खेल अविराम चल रहा है। यहाँ इस प्रकृति के जादूघर में कुछ भी स्थिर या नित्य नहीं है। संहार को ह्रदय से लगाए हुए ही सृजन का उदय होता है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।जीवन में अपनापन,ममता जो ईश्वर ने दिया है,सही में वही हमारे दुःखों का कारण भी है। जो पाकर हंसता है,उसको खोकर उससे कई गुना अधिक रोना ही पड़ता है और यहाँ का यह पाना होता ही है खोने के लिए - जन्म होता ही है मृत्यु के लिए - संयोग उत्पन्न ही होता है वियोग के निश्चित विधान को साथ लेकर! हम कुछ दिन रोते हैं, दुःखी होते हैं फिर उसी भाँति हम भी इस चोले को छोड़ कर नए के लिए चलते हैं ; चोला पुराना होने पर भी मोहवश छोड़ते हम घबराते हैं ; ममत्व के कारण किसी प्रकार की भी जरा भी विनाश की आशंका हमें व्याकुल कर देती है ;

परंतु विनाश तो अवश्यंभावी है ; नवीन सृजन के लिए उसकी आवश्यकता है,वह होता ही है और होता ही रहेगा।कब तक ? सो कौन कह सकता है।परंतु इतना तो कहा जा सकता है कि यह जन्म-मरणयुक्त जगत् चाहे सदा रहे ; परंतु इसमें हमारा जो विषयों के साथ ममत्व का संबंध है,वह तो सदा कभी नहीं रहेगा।आज हम अपने शरीर में माता,पिता,स्त्री,स्वामी,पुत्र-कन्या, आदि से प्रेम करते हैं,उनके बिना क्षणभर भी नहीं रह सकते।उनका जरा सा अदर्शन भी हमें असह्य हो जाता है।पर जब हम उन्हें छोड़ जाते हैं और दूसरे चोले में पहुँच जाते हैं,तब उनको याद भी नहीं करते।यही जीवन का सच्चा रहस्य एवं कड़वा सच है।