विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
बेरूत, लेबनान के सशस्त्र समूह हिज्जबुल्ला ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में इजरायली सेना के ठिकानों और सैन्य गतिविधियों को निशाना बनाते हुए एक दिन में 24 अलग-अलग सैन्य अभियान चलाए। समूह के अनुसार, इन अभियानों में रॉकेट, तोपखाने और ड्रोन जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिनका उद्देश्य इजरायली सैनिकों के जमावड़े और सैन्य वाहनों को निशाना बनाना था।
हिज्जबुल्ला द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 20 मई को उसकी सैन्य इकाई ‘इस्लामिक रेजिस्टेंस’ ने इजरायली सेना के खिलाफ कई समन्वित हमले किए। संगठन का दावा है कि इन अभियानों के जरिए सीमा क्षेत्रों में मौजूद इजरायली सैन्य गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान या संभावित हताहतों को लेकर कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
समूह ने कहा कि उसके लड़ाकों ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में इजरायली सेना के ठिकानों, सैनिकों की मौजूदगी वाले स्थानों और सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। हिज्जबुल्ला के मुताबिक, अवीविम, रमीम, रामोट नफताली और माले गोलानी समेत कई इलाकों में हमले किए गए, जहां इजरायली बलों की गतिविधियां होने का दावा किया गया।
बयान के अनुसार, हमलों में रॉकेट दागे गए, तोपखाने से गोलाबारी की गई और ड्रोन के माध्यम से भी सैन्य लक्ष्यों पर हमला किया गया। संगठन का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य सीमा क्षेत्र में इजरायली सैन्य तैनाती पर दबाव बनाना था। साथ ही कुछ हमले ऐसे क्षेत्रों पर भी किए गए जिन्हें संगठन ने इजरायल से जुड़े सैन्य या रणनीतिक ठिकाने बताया।
हिज्जबुल्ला ने यह भी दावा किया कि लेबनानी सीमा के पास स्थित कई बस्तियों और सैन्य गतिविधियों वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन दावों पर इजरायल की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव के बीच दोनों पक्षों के बीच टकराव की घटनाएं बनी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। हाल के महीनों में इजरायल और हिज्जबुल्ला के बीच कई बार हमले और जवाबी कार्रवाई देखने को मिली है, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की जाती रही है।
हिज्जबुल्ला के ताजा दावों ने एक बार फिर दक्षिणी लेबनान और इजरायल सीमा क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, घटनाओं से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक प्रभाव को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।







