Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

न्यू ईयर ईव पर संकट: देशभर में स्विगी, जोमैटो और अमेजन के डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल

नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय।

नई दिल्ली/मुंबई: आज यानी 31 दिसंबर, 2025 को जब पूरा देश नए साल के स्वागत की तैयारियों में डूबा है और लोग पार्टी की योजना बना रहे हैं, वहीं ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर रहने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। देश के प्रमुख ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जैसे स्विगी, जोमैटो, अमेजन, ब्लिंकिट और जेप्टो के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स ने आज सामूहिक रूप से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। 'इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स' के आह्वान पर बुलाई गई इस हड़ताल का व्यापक असर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में सुबह से ही देखने को मिल रहा है। सड़कों पर हमेशा नजर आने वाले लाल और नारंगी टी-शर्ट वाले डिलीवरी राइडर्स आज नदारद हैं, जिससे ऑनलाइन फूड और ग्रोसरी डिलीवरी की सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

डिलीवरी पार्टनर्स की इस हड़ताल के पीछे गहरा असंतोष और लंबे समय से चली आ रही मांगें हैं। प्रदर्शनकारी डिलीवरी बॉयज का कहना है कि कंपनियां एक तरफ तो त्योहारों के सीजन में भारी मुनाफा कमाती हैं, लेकिन दूसरी तरफ उनके प्रति ऑर्डर मिलने वाले कमीशन (पेआउट) में लगातार कटौती की जा रही है। बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की कीमतों के बीच उनका कहना है कि अब यह काम उनके लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह गया है। इसके अलावा, डिलीवरी पार्टनर्स '10-मिनट डिलीवरी' के मॉडल का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इतनी कम समय सीमा में डिलीवरी करने के दबाव के कारण उन्हें सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर वाहन चलाना पड़ता है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वे कंपनियों से एक सुरक्षित और मानवीय कार्य वातावरण की मांग कर रहे हैं।

हड़ताल का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की अनिश्चितता से जुड़ा है। गिग वर्कर्स का आरोप है कि कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट कारण के उनकी आईडी ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उनकी कमाई का एकमात्र जरिया अचानक बंद हो जाता है। वे सरकार और कंपनियों से मांग कर रहे हैं कि उन्हें केवल 'पार्टनर' न माना जाए, बल्कि उन्हें कर्मचारी का दर्जा देते हुए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और भविष्य निधि जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएं। यूनियन नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता और खासकर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्होंने नए साल की पार्टियों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर की योजना बनाई थी। कई इलाकों में मोबाइल ऐप्स पर 'सर्विसेज अनअवेलेबल' के मैसेज फ्लैश हो रहे हैं या फिर डिलीवरी का समय 2 से 3 घंटे की देरी से दिखाया जा रहा है। कई रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन मालिकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं क्योंकि उनके पास ऑर्डर पहुंचाने के लिए राइडर्स उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि कुछ कंपनियों ने आज के दिन एक्स्ट्रा इंसेंटिव देने का लालच देकर राइडर्स को मनाने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर वर्कर्स ने एकजुटता दिखाते हुए ऐप से लॉग-आउट रहना ही बेहतर समझा है।

कुल मिलाकर, यह हड़ताल आधुनिक 'गिग इकोनॉमी' की उन चुनौतियों को उजागर करती है जहाँ तकनीक और सुविधा के पीछे काम करने वाले मजदूरों के अधिकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नए साल की यह पूर्व संध्या न केवल ग्राहकों के लिए असुविधाजनक साबित हो रही है, बल्कि कंपनियों और सरकार के लिए भी एक चेतावनी है कि वे इन फ्रंटलाइन वर्कर्स की सुरक्षा और पारिश्रमिक पर गंभीरता से विचार करें। यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में ऑनलाइन होम डिलीवरी का पूरा ढांचा प्रभावित हो सकता है।